बौद्ध ग्रंथ Current Affairs in Hindi 1

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बौद्ध ग्रंथ
प्रारम्भिक बौद्ध ग्रंथ को सामान्य दृष्टिकोण से धर्म सिद्धांत तथा धर्मसिद्धांततेतर दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। किसी भी धर्म का सैद्धान्तिक संकलन उस धर्म से जुड़े मूलभूत अभिनियमों का निष्पादन करता है। विभिन्न बौद्ध सम्प्रदायों ने बौद्ध धर्म सिद्धांत के साहित्य को 9 अथवा 12 अंगों में तथा इनमें से कुछ ने इन्हें तीन पिटकों में बांटा है।

Current Affairs in Hindi


तिपिटक (तीन डलिया/संग्रह) के पालि, चीन और तिब्बती संस्करण हैं। थेरवाद मत की पालि तिपिटक, इनमें सबसे पुराना है। मगध क्षेत्र में बोली जाने वाली कई बोलियों के मिश्रण से पालि भाषा का विकास हुआ था।

तिपिटका के तीन खण्ड है सुत्त, विनय और अभिधम्म। बौद्ध सन्दर्भ में ‘सुत्त’ (संस्कृत में सूत्र) उन धार्मिक अभिनियमों को कहते हैं, जिन्हें बुद्ध ने स्वयं उपदेश के रूप में कहा था। सुत्तपिटक में बुद्ध के धार्मिक सिद्धांतों को संवाद के रूप में संकलित किया गया है। विनयपिटक में संघ के भिक्षु एवं भिक्षुणी के लिए बनाए गए नियमों का संग्रह किया गया है। Current Affairs in Hindi

इसमें पतिमोख (प्रतिमोक्ष) भी जुड़ा हुआ है, जिसमें संघ के अनुशासन को तोड़ने पर किए जाने वाले प्रायश्चितों की सूची दी गई है। अभिधम्मपिटक बाद में जोड़ा गया है। जिसमें सुत्त पिटक में वर्णित सिद्धांतों के सुव्यवस्थित अनुशीलन के लिए आवश्यक सूचियों के सारांश तथा प्रश्नोत्तरी का समावेश किया गया है।
तिपिटक को पुनः उपखण्डों में विभाजित किया गया है जिन्हें निकाय कहते है। निकाय बौद्ध संस्कृत परंपरा में रचित आगमों जैसे हैं, लेकिन वे एकदम समरूप नहीं हैं। सुत्त पिटक में पाँच निकाय हैं दीघ, मज्झिम, संयुत्त, अंगुत्तर, खुद्दक।

बुद्ध के पूर्व जन्मों से जुड़ी जातक कथाएं खुद्दक निकाय की पंद्रह पुस्तकों में से एक है जिनको तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. से दूसरी शताब्दी सा.सं. के बीच में लिपिबद्ध किया गया होगा। खुद्दक निकाय में धम्मपद (नैतिक उपदेशों का पद्यात्मक संकलन), थेरगाथा (बौद्ध भिक्षुओं के गीत) और थेरीगाथा (बौद्ध भिक्षुणियों के गीत) हैं। Current Affairs in Hindi

थेरीगाथा का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि स्त्रियों के संन्यास की अनुभूति के रूप में ये भारतीय इतिहास में उपलब्ध वैसी प्राचीनतम रचनाएं हैं, Current Affairs in Hindi जिनको विशिष्ट रूप से स्त्री के द्वारा संकलित किया गया अथवा नारियों को इसका श्रेय दिया जा सकता है।

बौद्ध परंपरा के अनुसार बुद्ध की मृत्यु के तुरन्त पश्चात्, राजगीर में बुलायी गयी प्रथम भिक्षुओं की परिषद् में और बुद्ध की मृत्यु के 100 वर्ष पश्चात् वैशाली की द्वितीय बौद्ध संगीति में सुत्तपिटक और विनयपिटक का पाठ किया गया। किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि अशोक के काल में बुलायी गयी तृतीय बौद्ध संगीति तक इनका संकलन जारी रहा।

इस प्रकार पालि तिपिटकों का संकलन काल पाँचवी तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. माना जा सकता है। पालि तिपिटकों को पहली शताब्दी सा.सं.पू. में श्रीलंका के शासक वत्तगामिनी की देख-रेख में पहली बार लिपिबद्ध किया गया। स्वाभाविक है तब तक इनमें काफी संशोधन किया जा चुका होगा। Current Affairs in Hindi

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पालि में संकलित धर्म सिद्धांतेतर बौद्ध साहित्य में मलिन्दपन्ह (पहली शताब्दी सा.सं.पू. पहली शताब्दी सा.सं.) अधिक प्रसिद्ध है, जिसमें इण्डो-ग्रीक शासक मिनेण्डर और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच दार्शनिक बिन्दुओं पर प्रश्नों का उत्तर दिया गया है। बुद्ध के उपदेशों से जुड़ी हुई पुस्तक, नेतिगन्ध या नेत्तिप्रकरण इसी काल की रचना है।

पाँचवी शताब्दी में बुद्धघोष द्वारा लिखी गई तिपिटकों की व्याख्या भी महत्त्वपूर्ण है। बुद्ध की जीवन कथा से सम्बंधित पहली महत्त्वपूर्ण रचना निदानकथा पहली शताब्दी सा.सं. में लिखी गई। श्रीलंका की पालि बौद्ध रचनाओं में दीपवश (चौथी पाँचवीं शताब्दी) तथा महावंश (पाँचवीं शताब्दी) ऐतिहासिक और मिथकीय विषयों का मिश्रण है जिनमें बुद्ध की जीवन कथा, बौद्ध संगीतियाँ, मौर्य सम्राट अशोक, श्रीलंका के राजवंश तथा बौद्ध धर्म का श्रीलंका में आगमन जैसे विषयों का वर्णन है।

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पालि के अतिरिक्त संस्कृत अथवा बौद्ध संस्कृत (संस्कृत और प्राकृत का संयुक्त प्रयोग) में भी बौद्ध साहित्य की उत्कृष्ट परम्परा रही है। महायान मत के उदय के साथ बौद्ध रचनाओं के सृजन के लिए संस्कृत का उपयोग बढ़ने लगा। किन्तु सर्वस्तीवाद जैसे महानेत्तर बौद्ध संप्रदायों में भी धार्मिक सिद्धांतों का संकलन संस्कृत में हुआ है।

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उदाहरण के तौर पर, सर्वस्तीवाद का सिद्धांत संस्कृत में है। महावस्तु नामक बौद्ध ग्रंथ में महायान मत का प्रभाव है। उसमें बुद्ध के जीवन कथा का धार्मिक संस्करण उपलब्ध है। उसके अतिरिक्त संस्कृत प्राकृत मिश्र भाषा में संघ के अभ्युदय एवं विकास की विवेचना की गई है।

पहली दूसरी शताब्दी की रचना ललितविस्तार में भी बुद्ध की जीवन कथा का धार्मिक संस्करण उपलब्ध है। यह रचना सर्वस्तीवाद सम्प्रदाय की होते हुए भी महायान मत से बहुत प्रभावित है। यह रचना संस्कृत तथा मिश्र संस्कृत प्राकृत भाषा में लिखी गई। जीवन-चरित्र के धार्मिक संस्करण की इस विधा को ‘हेजियोग्राफी’ की संज्ञा दी गई।

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संस्कृत में लिखे बौद्ध साहित्य में अश्वघोष का बुद्धचरित (पहली दूसरी शताब्दी) Current Affairs in Hindi तथा अवदान साहित्य प्रमुख हैं। नैतिक उपदेशों के साथ लिखी गई अवदान कथा की श्रेणी में अवदान शतक (द्वितीय शताब्दी) और दिव्यावदान (चतुर्थ

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