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बंगाल में अंग्रेजी सत्ता स्थापना प्लासी से 1772 तक

प्रस्तावना

भारत में अंग्रेजी राजसत्ता का श्रीगणेश बंगाल प्रान्त से शुरू हुआ। बंगाल में अंग्रेजी सत्ता की स्थापना की कहानी बड़ी रोचक एवं विस्मयकारी है history gk question and answer in hindi।

बंगाल से शुरू करके अंग्रेजों ने धीरे-धीरे मराठों, अफगानों को किनारे करते हुए सम्पूर्ण भारत पर कब्जा जमा लिया। यहां सवाल यह उठता है कि एक व्यापारिक कम्पनी अपने मु‌ट्ठी भर सैनिकों के बल पर यह कार्य कैसे कर सकती है। हम इस यूनिट में इसी कैसे का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे।

प्राचीन समय से ही बंगाल भारत का सबसे समृद्ध प्रान्त था। यह प्राना केवल अपने उर्वर भूमि के कारण कृषि में अपितु व्यापार वाणिज्य एवं लघु उद्योगों के लिये भारत में ही नहीं संसार भर में प्रसिद्ध था। बंगाल की इस समृद्धि ने ही अंग्रेजों को आकर्षित किया।

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उद्देश्य

  • इस इकाई को पढ़ने के बाद आप
  • बंगाल में अंग्रेजी कम्पनी के प्रारम्भिक व्यापारिक प्रवेश के बारे में जान सकेंगे।
  • कम्पनी के व्यापारिक शक्ति से राजनीतिक शक्ति बनने की कहानी जान सकेंगे।
  • अंग्रेजी सत्ता की स्थापना के क्रम में प्लासी एवं बक्सर युद्ध के कारणों एवं परिणामों को समझ सकेंगे।
  • इस इकाई के अध्ययन से बंगाल में स्थापित हैभ शासन प्रणाली के बारे में जान सकेंगे।
  • बंगाल में द्वैध शासन के दुष्परिणामों को जान सकेंगे।
  • कालाइव के कार्यों एवं योगदान से परिचित हो सकेंगे।

बंगाल में अंग्रेजी कम्पनी का प्रवेश

सर्वप्रथम 1651 में अंग्रेजों ने बंगाल के सूबेदार शाहशुजा की अनुमति से हुगली में अपना गोदाम बनाया। उसी वर्ष आगरा में मुगल राज परिवार की महिला का अंग्रेज डाक्टर वौटन द्वारा सफल शल्य विकित्सा से प्रसन्न होकर मुगल सम्राट ने 3000 रूपये वार्षिक में बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा में मुक्त व्यापार की अनुमति दे दी history gk question and answer in hindi।

शीघ्र ही अंग्रेजों ने पटना, काशिम बाजार एवं अन्य महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थलों पर कोठियां (गोदाम) बना लिया। 1098 में मुगल सम्राट औरंगजेब के पुत्र एवं बंगाल के तत्कालीन सूबेदार अजीमुशान ने 1200 रूपये के बदले अंग्रेजों को तीन गांवों सुतानती, कालीघाट एवं गोविन्दपुर की जमीदारी दे दी history gk question and answer in hindi।

इसी क्षेत्र को अंग्रेजों ने कलकत्ता के रूप में विकसित किया, जहां उन्होंने बगाल के अपने पहले किले सेंट फोर्ट विलियम की स्थाना की। वर्ष 1717 में सम्राट फर्कखसीयर ने पुराने सूबेदारों द्वारा दी गयी समस्त व्यापारिक रियायतों की पुष्टि कर दी।

बंगाल की राजनीतिक दशा

मुगलों के अधीन बंगाल का शासन सम्राट द्वारा नियुक्त सूबेदार द्वारा होता था। सल्तनत काल के समय से ही बंगाल अपनी समृद्धि एवं दिल्ली से दूर होने के कारण महत्वाकांक्षी सरदारों को विद्रोह की लिये प्रेरित करता था। मुगलों ने बंगाल में सूबेदारों के विद्रोह को नियंत्रित करने के लिये प्राय राज परिवार के व्यक्ति को ही बंगाल की सूबेदारी प्रदान की history gk question and answer in hindi।

सूबेदार की अनुपस्थिति में यह कार्य दीवान करता था। सन् 1700 में सम्राट औरंगजेब ने मुर्शीदकुली खान को बंगाल का दीवान बनाया। सन् 1707 में औरंगजेब की मृत्यु ने मुगल शक्ति के खोखले आवरण को गष्ट कर दिया। सम्राट बनने के लिये मुगल राजकुमारों ने षड़यन्त्र धोखा एवं निर्लज्ज लोलुपता दिखाई, जिससे बड़े-बड़े सूबेदारों ने अपने लाभ को दृष्टिगत रखते हुए इस लड़ाई में भाग लिया।

मुगलों की इस स्थिति को देखते हुए मुर्शीदकुली खान ने बंगाल में अपने को स्वतन्त्र कर लिया तथा बंगाल का नवाब बन गया। मुर्शीदकुली खान की मृत्यु के बाद शुजाउ‌द्दीन तथा उसकी मृत्यु के बाद सरफराज खां बंगाल का मयाब बना history gk question and answer in hindi।

सन् 1741 में बिहार का नायब सूबेदार अलीवर्दी खां बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा के नायब सरफराज खां से विद्रोह करके उसे युद्ध में परास्त कर मार डाला तथा इस क्षेत्र का स्वय नवाब बन गया। मुगल सम्राट मोहम्मदशाह ने बहुत से धन के बदले अलीवर्दी खां को बंगाल का नवाब स्वीकार कर लिया।

अलीवर्दी खां एक योग्य एवं महत्त्वाकांक्षी सरदार था. इसने बंगाल की स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास किया, किन्तु इसका अधिकांश समय एवं शक्ति मराठों से अपने राज्य को बचाने में नष्ट हो गयी। मराठों के बार-बार आक्रमण ने बंगाल में भय एवं अराजकता फैलाई।

अलीवर्दी खां की मृत्यु (1756) से बंगाल की राजनीति में षडयन्त्र गुटबन्दी एवं आपसी द्वेष की शुरुआत हुई। अलीवर्दी खां को कोई पुत्र नहीं था, केवल तीन पुत्रियां थीं। इनमें बढ़ी पुत्री घसीटी बेगम् दूसरी पुत्री का पुत्र शौकत जंग जो पूर्णिया का अधिकारी था तथा छोटी पुत्री का पुत्र सिराजुद्‌दौला का आपसी सम्बन्ध अच्छा नहीं था history gk question and answer in hindi।

अलीवर्दी ने अपने दौहित्र 17 वर्षीय सिराजु‌द्दौला को बंगाल का नयाब बनाया किन्तु घसीटी बेगम एवं शौकत जंग सिराज को नयाম मानने के लिये तैयार नहीं थे। इसलिये सिराजु‌द्दौला ने सबसे पहले इस आनारिक झगडे को सुलझाने का प्रयास किया। सिराज ने पुर्णिया के नवाब शौकत जंग को परास्त कर मार डाला तथा घसीटी बेगम की शक्ति को तोड़ दिया, लेकिन इससे सिराज की समस्याओं का अंत नहीं हुआ। मराठे और यूरोपीय लोग राज्य में अशान्ति के कारण बने रहे।

अंग्रेज और सिराजुद्‌दौला

सिराज के नवाब बनने के समय अन्य पूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों ने परम्परानुसार दरबार में पेश हुए किन्तु अंग्रेज दरबार में नहीं गये। यूरोप में इस समय सप्तवर्षीय युद्ध की आशंका के कारण भारत में अंग्रेज एवं फ्रांसीसी अपने को सुदृढ़ बनाने लगे। फ्रांसीसी चन्द्र नगर की तथा अंग्रेज कलकत्ता की किलेबन्दी शुरू कर चुके थे history gk question and answer in hindi।

सिराज ने ऐसे कार्यों को अपने राज्य में अनुचित मानते हुए इसे रोकने को कहा। फ्रांसीसी तो मान गये किन्तु अंग्रेजों ने फोर्ट विलियम के चारो और खाई तथा परकोटे पर तोपे चढ़ा लिया और सिराज के विरुद्ध कुछ भगोडी को शरण गी। इसरो कन्द्र होकर सिराज ने अंग्रेजों के विरुद्ध अभियान किया history gk question and answer in hindi।

15 जून 1756 को फोर्ट विलियम घेर लिया गया तथा 5 दिनों में ही अंग्रजों ने आत्मसमर्पण कर दिया। गर्वनर रोजर ब्रेक एवं अन्य महत्त्वपूर्ण अंग्रेज पीछे के द्वार से भाग निकले। नवाब कलकत्ता को जीत कर इसका नाम अलीनगर करते हुए इसे मानिकचन्द्र को सौंपकर वापस मुर्शिदाबाद लौट गया।

ब्लैक होल की घटना

history gk question and answer in hindi यह एक बहुचर्चित घटना है. जिसे अंग्रेज कम्पनी ने नवाब के विरुद्ध आक्रामक युद्ध के लिये प्रचार का साधन बनाये रखा। इस घटना के अनुसार फोर्ट विलियम के पतन के बाद बन्दी बनाये गये अंग्रेज स्त्रियों एवं बच्चों की जिनकी संख्या 146 थी एक 14 फुट 10 इंच की कोठरी में बन्द कर दिया गया। भयंकर गर्मी एवं दम घुटने से अगले प्रातः केवल 23 बन्दी ही जीवित बचे शेष घुटन अथवा कुचले जाने के कारण मर गये।

अंग्रेजों ने इस घटना के लिये सिराज को उत्तरदायी ठहराया। यद्यपि इतिहासकार गुलाम हुसैन अपनी पुस्तक सियार-उल-मुत्खैरीन में इसका कोई उल्लेख नहीं करता है। जे०जेय० हालवैल जो जीवित बच गया था तथा इस कहानी का रचयिता माना जाता है, किसी बन्दी अथवा करने वाले के नाम का उल्लेख नहीं करता है। इसलिये यह घटना सन्देहास्पद प्रतीत होती है। यदि यहा घटना सत्य भी हो तो यह कार्य किसी अधीनस्थ अधिकारी का था, जिसका दोष सिराज पर मढ़ना न्यायोचित नहीं लगता।

अलीनगर की सन्धि फरवरी 1757

history gk question and answer in hindi मद्रास के अधिकारियों ने कलकत्ता के पतन का समाचार सुनते ही फांसीसियों के विरूद्ध गठित सेना को क्लाय के नेतृत्व में कलकत्ते को इस हिदायत के साथ भेजी कि शीघ्रातिशीघ्र कार्य करके इस सेना को लौटना था. क्योंकि कभी भी इसकी आवश्यकता फ्रांसीसियों के विरुद्ध पठ सकती थी थी।

क्लाइव ने बठी आसानी से बिना युद्ध के नवाब के प्रभारी अधिकारी मानिक चन्द्र को घूस देकर कलकत्ता वापस प्राप्तकर लिया। इधर सिराज मराठों के भय के कारण अंग्रेजों से युद्ध न करके फरवरी 1757 में अली नगर की सन्धि कर लिया। इस सन्धि के अनुसार अंग्रेजों को व्यापार के पुराने अधिकार वापस मिल गये। कलकत्ता के किलेबन्दी की अनुमति भी मिली तथा क्षतिपूर्ति का भी वचन दिया गया।

प्लासी का युद्ध

history gk question and answer in hindi राबर्ट क्लाइय जो एक महत्वाकाशी एवं अत्यन्त चालाक व्यक्ति था यह अली नगर की सन्निध से सन्तुष्ट नहीं हुआ। उसे अपने गुप्तचरों से यह ज्ञात हो चुका था कि सिराजुद्‌दौला के कई अधिकारी लालची एवं भ्रष्ट है।

मानिकचन्द्र का उदाहरण उत्तके सामने था. अतः बलाइय ने एक षडयन्त्र रचा जिसमें नवाब के सेनापति गौर जाफर, प्रभावशाली साहूकार जगत सेठ, राय दुर्लभ एवं अमीनचन्द सम्मिलित हो गये। इसमें निश्चय हुआ कि मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया जाय, जिसके लिये वह कम्पनी एवं मददगार लोगों को धन एवं पद से कृतार्थ करेगा।

उकसावे के लिये अंग्रजों ने फ्रांसीसी बस्ती बन्द्रनगर को मार्च 1757 में जीत लिया। एक ऐसे समय में जब अफगानों एवं मराठों का मय नवाब को सता रहा था. ( history gk question and answer in hindi top 100) क्लाइव सेना सहित नवाब के विरुद्ध मुर्शिदाबाद की ओर बढ़ा। जिससे विवश होकर सिराज को भी युद्ध के लिये आगे बढ़ना पड़ा।

23 जून 1757 को दोनो सेनाये मुर्शिदाबाद से 22 मील दक्षिण में प्लासी के स्थान पर एक दूसरे से टकरायी। यद्यपि संख्या की दृष्टि से अंग्रेजों की तुलना में नवाब की सेना बहुत बड़ी श्री, किन्तु सेनापति मीर जाफर के विश्वासघात के कारण नवाब की सेना की पराजय हुई history gk question and answer in hindi।

नयाब की सेना के अग्रगामी दल ने जिसका नेतृत्व मीर मदान एवं मोहन लाल कर रहे थे, अंग्रेजी सेना को पीछे हटने के लिये बाध्य किया था, किन्तु सिराज का 2000 घुड़सवारों के साथ वापस युद्ध से लौटना तथा मीर जाफर के असहयोग से बाजी अंग्रेजों के हाथ लगी। मीर जाफर 25 जून को मुर्शिदाबाद लौटा तथा अपने आपको नवाब घोषित कर दिया।

सिराज को बन्दी बना लिया गया तथा उसकी हत्या कर दी गयी। मीर जाफर ने अंग्रेजों को उनकी सेवाओं के लिये 24 परगना की जनींदारी से पुरस्कृत किया। क्लाइव को 2 लाख 34 हजार पौंड की भेंट तथा 80 लाख रूपया सेना एवं नायिकों को दिया। बंगाल की समस्त फ्रांसीसी बस्ती अग्रेजों को दे दी गयी तथा अंग्रेज पदाधिकारियों एवं व्यापारियों को निजी व्यापार पर चुगी से छूट दे दी गयी।

प्लासी के युद्ध का महत्व

सामरिक दृष्टि से देखा जाय तो इस युद्ध का कोई विशेष महत्व नहीं है क्योंकि यह कोई युद्ध नहीं अपितु छोटी सी झड़म थी, जिसमें अंग्रेजों की तरफ से 65 तथा नवाब की सेना के 500 व्यक्ति हताहत हुए, इसीलिये के०एम० पन्निकर ने इस युद्ध के बारे में लिखा है यह एक सौदा था, जिसमें बंगाल के धनी सेठों तथा मीर जाफर ने नवाब को अंग्रेजों के हाथ बेथ डाला।”

प्लासी के युद्ध का महत्व केवल उसके बाद होने वाली घटनाओं के कारण है. इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए मालेसन ने लिखा है कि सम्भवतः इतिहास में इतना प्रभावित करने वाला युद्ध कभी नहीं लड़ा गया. इस युद्ध के कारण इंग्लैण्ठ मुस्लिम संसार की सबसे बड़ी शक्ति बन गया, इसी के कारण उसे मारीशश तथा आशा अन्तरीय को विजय करने तथा उन्हें अपना उपनिवेश बनाने पर बाध्य होना पड़ा तथा मिश्र को अपने संखक्षण में लेना पड़ा history gk question and answer in hindi।

यद्यपि नालेसन की यह बात में अतिशयोक्ति होते हुए भी काफी हद तक उचित ही लगती है क्योंकि बगाल अंग्रेजों के अधीन हो गया और फिर स्वतन्त्र नहीं हो सका। इस युद्ध के बाद बंगाल की लूट ने अंग्रेजों को अपार साधनों का स्वामी बना दिया history gk question and answer in hindi।

मैकाले के अनुसार अंग्रेजों को बंगाल से मिले धन की पहली किस्त 8 लाख पौंड की थी जो चांदी के सिक्कों के रूप में थी तथा जिसे 100 से अधिक नावों में भरकर कलकत्ता से लाया गया। बंगाल के इसी भन ने अंग्रेजों को दक्षिण में फ्रांसीसियों के खिलाफ विजय दिलवाई तथा कम्पनी का भी कायाकल्प कर दिया। बंगाल वो इसी धन ने आगे चलकर अंग्रेजों की भारत पर सत्ता स्थापित करने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्लासी के बाद

history gk question and answer in hindi top 100 questions in hindi मौर जाकर को क्लाइय का गीदड़ कहा जाता है. वह अग्रेजों के हाथ की कठपुतली था, जो अपने पद तथा रक्षा के लिये अंग्रेजों पर निर्भर था। प्लासी युद्ध के बाद कम्पनी व्यापारिक कम्पनी की जगह सैनिक कम्पनी बन गयी जिसे अपने युद्धों के लिये निरन्तर धन की आवश्यकता व्था।

इस मन की पूर्ति मीर जाफर नहीं कर सकता था। शीघ्र ही यह अंग्रेजों के दासत्य से दुखी हो गया। मीर जाफर के ऊपर कम्पनी का बकाया सन 1700 तक 25 लाख हो गया। इरा बकाया धन को चुकाने का सामर्थ्य मीर जाफर में नहीं था. अतः यह डब लोगों से मिलकर अंग्रेजों को भगाने की सोचने लगा।

लेकिन क्लाइव ने नवम्बर 1759 में वेदरा के युद्ध में उचों को परास्त कर इरा षडयन्त्र को असफल बना दिया। जब मीर जाफर ने इन घटनाओं से अपने को अनभिज्ञ बताया तो उसे गददी छोडने के लिये बाध्य किया गया history gk question and answer in hindi।

अंग्रेज एवं मीर कासिम

मीर जाफर का दामाद मीर कासिम एक योग्य एवं महत्वाकांक्षी व्यक्ति था, उसने इस स्थिति का लाभ उठाकर अपने आपको अंग्रेजों का मित्र तथा नवाब के प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया। ( history gk question and answer in hindi ) फलतः मीर कासिम एवं कलकत्ता काउंसिल के बीच सितम्बर 1760 में एक सन्धि हो गयी, जिसके अनुसार

  • 1- मीर कासिम ने कम्पनी को वर्यवान, मिदनापुर तथा चटगांव के जिले देना स्वीकार किया।
  • 2 सिल्हट के चूने के व्यापार में कम्पनी का आधा हिस्सा होगा।
  • 3-मीर कासिम कम्पनी को दक्षिण अभियानों के लिये 5 लाख रूपये देगा।
  • 4- मीर कासिम कम्पनी के मित्र को मित्र एवं शत्रु को शत्रु मानेगा।
  • 5-कम्पनी आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी तथा नवाब को सैनिक सहायता देगी।

सन्धि को कार्यान्वित करने के लिये वेनसिटार्ट एवं केलाङ मुर्शिदाबाद पहुंचे। महल घेर लिया गया विश्वासघाती मीर जाफर ने ग‌द्दी छोड़ दी तथा 15 हजार पेंशन पर कलकत्ते में रहना स्वीकार किया। मीर जाफर को अपने कर्मों का फल मिल चुका था। अब अगली बारी मीर कासिम जी थी।

नवाब के रूप में कासिम

नवाब बनते ही मीर कासिम ने चेनसिटार्ट, कैलार्ड एवं अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को 17 लाख रूपये घूस के रूप में दिया। मीर कारिम एक योग्य व्यक्ति था, उसने राजधानी अंग्रेजों से दूर मुंगेर में स्थानान्तरित किया। सेना का गठन यूरोपीय ढंग से तथा तोपों एवं बन्दूकों को बनाने की व्यवस्था की history gk question and answer in hindi।

नवाब मीर कासिम की इच्छा थी कि वह अपना शासन स्वतन्त्र होकर करे। वह अपने राज्य को नेपाल की ओर विस्तारित करने की आशा रखता था. इसलिये उसने पहले बंगाल में शान्ति एवं स्थिरता पैदा करने की कोशिश की उसने बिहार के उप सूबेदार राम नरायन को जो बिहार में लगभग स्वतन्त्र होकर कार्य कर रहा था.

उसे सेवा से हटा दिया तथा मार डाला। उसने उन अधिकारियों पर जिन्होंने गबन किया था. उन पर जुमाने लगाये तथा आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिये कुछ नये एवं अतिरिक्त कर लगाये। समकालीन इतिहासकार गुलाम हुसैन मीर कासिम के प्रशासन की बड़ी प्रशसा करता है history gk question and answer in hindi.

यह लिखता है कि मीर कासिम ने प्रशासन की गुत्थियों विशेषकर वित्तीय मामलों को बड़ी कुशलता से सुलझाया। सेना तथा सेवकों को नियमित रूप से वेतन मिलता था, अच्छे लोगों का आदर होता था, उसके व्यवहार में उदाहरता एवं कृपणता दोनों का समावेश था history gk question and answer in hindi।

कम्पनी एवं कासिम

शुरू में नवाब कासिम एवं कम्पनी के सम्बन्ध मधुर रहे, क्योंकि कासिम ने कम्पनी की आर्थिक मांगों को सफलता से पूरा कर रहा था, किन्तु यह सम्बन्ध अधिक दिनों तक अच्छे नहीं रह सके, कारण था कम्पनी एवं कासिम के उद्देश्य एवं हित एक दूसरे के विपरीत थे। जहां कम्पनी एक डरपोक एवं कवपुतली नयाब चाहती थी, पहीं कासिम स्वतन्त्र एवं निरपेक्ष नवার बनने की आकाक्षा रखता था।

गर्वनर हैरी बेरेलस्ट ने अपनी पुस्तक में मीर कासिन एवं कम्पनी के झगड़ों को दो भागों में बांटते एवं लिखा है कि अगले का तात्कालिक कारण आन्तरिक व्यापार था, किन्तु वास्तविक कारण नवाब की राजनैतिक महत्वकांक्षा थी, वह लिखाता है यह असम्भव था कि मीर कासिम अपनी सरकार की नींव हमारे समर्थन पर रखते हुए स्वाधीनता का व्यवहार करे history gk question and answer in hindi।

प्रो० डाळवेल भी इसका समर्थन करते हुए लिखते हैं कि “स्थिति की प्रमुख बात यह थी कि अंग्रेज तथा नवाब के हित एक दूसरे के विरोधी थे, स्थिति में स्थिरता उस समय तक नहीं आ सकती थी, जब तक नवाब अपने आपको स्वतन्त्र मानता रहता तथा अंग्रेज वे अधिकार मांगते रहते जो इप्त परिस्थिति के अनुकूल नहीं थे।”

मीर कासिम एवं कम्पनी का झगड़ा आन्तरिक व्यापार को लेकर शुरू हुआ। कम्पनी को 3000 रूपये के बदले मुगल सम्राट ने व्यापारिक कर से छूट दे दी थी। कम्पनी के आन्तरिक व्यापार पर कोई विवाद नहीं था, बल्कि विवाद कम्पनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार को लेकर था history gk question and answer in hindi।

कासिम आन्तरिक व्यापार में उस दस्तक की बात उठाता था, जिसमें कम्पनी के अधीनस्थ कर्मचारी निजी व्यापार करते थे। यह दस्तक केवल अंग्रेज कर्मचारी ही नहीं भारतीय लोगों को भी बेचे जाते थे. इससे नवाब को आन्तरिक व्यापार पर कर का नुकसान होता था history gk question and answer in hindi।

कम्पनी के कर्मचारी केवल कर रहित व्यापार से ही संतुष्ट नाहीं थे, वे बाजार से बल प्रयोग द्वारा सामान सत्ता खरीदते थे तथा नवाब के कानूनों का निरादर एवं अपमान करते थे। मीर कासिम ने कम्पनी को लिखा आपके भद्र पुरुष इस प्रकार का व्यवहार करते है, ये समस्त देश में गड़बड़ी फैलाते है. लोगों को लूटते हैं तथा मेरे अधिकारियों का निरादर करते हैं तथा उन्हें शारीरिक यातनाएं देते हैं। मूल्य का चौथाई दाम देते हैं। इनके ऐसे कार्यों से मुझे 25 लाख का वार्षिक नुकसान हो हरा है।”

आन्तरिक व्यापार के इस गतिरोध को दूर करने के लिये वेससिटार्ट के नेतृत्व में एक दल नवाब से मिला तथा एक समझौता हो गया जिसमें अंग्रेज कर्मचारियों को व्यापार पर 9 प्रतिशत कर देना था तथा दस्तक देने का अधिकार नवाब का माना गया, किन्तु इस समझौते को कलकत्ते की काउंसिल ने अस्वीकार कर दिया, जिससे कुद्ध होकर नयाब ने आन्तरिक व्यापार पर लगे कर को ही समाप्त कर दिया history gk question and answer in hindi।

नयाब के इस निर्णय को अनुचित नहीं व्हराया जा सकता, किन्तु अब अंग्रेजों को होने वाला लाभ कम हो गया। कम्पनी वाहती थी कि नयाब अपनी प्रजा पर कर लगाये। यहां झगड़ा न्याय एवं अन्याय का न होकर शक्ति का था। मीर कासिम की स्थिति विकट हो गयी, लोग उस पर हसते थे जो कार्य उसने अपने श्वसुर के विरूद्ध किया था. यही उसके गले आ पड़ा history gk question and answer in hindi।

बक्सर का युद्ध सन् 1764

history gk question and answer in hindi top 100कम्पनी तथा नवाब के इस तनावपूर्ण सम्बन्ध में शान्ति की कोई गुजाइश नहीं थी। नवाब अपनी कमजोर स्थिति से अनभिज्ञ नहीं था. इसलिये मीर कासिम ने अवध के नवाब एवं मुगल सम्राट से मिलकर अंग्रेजों का खदेड़ने की योजना बनाई। इन तीनों की सम्मिलित सेना का मुकाबला बक्सर नामक स्थान पर अंग्रेजी सेना से हुआ।

22 अक्टूबर 1764 को हुए इस मुकाबले में अंग्रेजी सेनापति मेजर मनरो की जीत हुई। बक्सर में घमासान युद्ध हुआ था। इसमें अंग्रेजों के 847 तथा दूसरी ओर के 2000 सिपाही घायल अथवा हताहत हुए। दोनों ओर से चटकर युद्ध लड़ा गया, किन्तु अधिक कुशल एवं प्रशिक्षित सेना की विजय हुई।

बक्सर के युद्ध का महत्व

उक्ार का युद्ध भारत के इतिहास में होने वाले महत्वपूर्ण युद्धों में से एक है। इस युद्ध के परिणाम भारत के लिए स्थायी एवं दीर्घजीवी हुए। अब प्लासी युद्ध के निर्णय पर पक्की मोहर लग गयी history gk question and answer in hindi।

भारत में अब अंग्रेजों को चुनौती देने वाला कोई नहीं रह गया। बंगाल में फिर वही कठपुतली मीर जाफर को नवाच बनाया गया। अवध का नयाब अंग्रेजों का आभारी एवं मुगल सम्राट उनका पेशनर बन गया। इलाहाबाद तक का प्रदेश अंग्रेजों की अधीनता में आ गया तथा दिल्ली को लेने का रास्ता खुल गया। भारत की दासता अब निश्चित थी।

history gk question and answer in hindi बक्सर युद्ध के बाद फौरी तौर पर मीर जाफर को पुनः नवाब बना दिया गया, किन्तु अब जबकि पूरा उत्तर भारत कम्पनी के कदमों में था, इस जटिल राजनीतिक स्थिति को नियंत्रित करना, बंगाल में शान्ति व्यवस्था बनाना तथा व्यापार को नियमित कर अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने हेतु एक कर्मठ एवं योग्य व्यक्ति की आवश्यकता थी।

history gk question and answer in hindi बक्सर के युद्ध का समाचार जब ब्रिटेन पहुंचा तो सबका मत यह था कि जिस व्यक्ति ने भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की नीव रखी है उसे ही उस साम्राज्य को सुदृढ बनाने के लिये भेजा जाय।

इसलिए लार्ड कलाइव को भारत में अंग्रेजी प्रदेशों का गर्वनर बनाकर भेजा गया। कम्पनी के कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी धन लोलुप होकर पूर्णतया भ्रष्ट हो गये हैं, जिससे कम्पनी का व्यापार एवं जनता की स्थिति चिन्ताजनक बन चुकी है। क्लाइव को अब शीघ्रता से उस स्थिति को सम्मालना था, जिसके लिये उसने निम्न कदम उठाये।

बंगाल में कम्पनी का राजनैतिक शक्ति के रूप में उदय

गर्वनर के रूप में क्लाइव के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती राजनैतिक व्यवस्था की थी उसे निर्णय लेना था कि अवध एवं मुगल सम्राट के साथ क्या करना है तथा बंगाल में राजनैतिक सत्ता के स्वरूप में किस प्रकार का परिवर्तन करना है history gk question and answer in hindi।

इलाहाबाद की सन्धि

इलाहाबाद की सन्धि (16 अगस्सा 1765) की जिसके अनुसार

  • शुजाउद्‌दौला इलाहाबाद एवं कारा का जिला सम्राट शाह आलम को देगा।
  • युद्ध की क्षतिपूर्ति के लिये कम्पनी को 50 लाख रूपया देगा।
  • बनारस के जागीरदार को उसकी जागीर में प्रस्थापित करेगा। इसके बदले कम्पनी उसके
  • समस्त क्षेत्र को लौटा देगी
  • इस व्ययस्था के अतिरिक्त नवाब शुजाउद्‌दौला ने कम्पनी के साथ आक्रामक एवं रक्षात्मक सन्धि की।

मुगल सम्राट से सन्धि

क्लाइय ने बड़ी चालाकी से मुगल सम्राट शाह आलम से इलाहाबाद में ही दूसरी सन्धि की, जिसके अनुसार भगोळे शाह आलम को अंग्रेजी संरक्षण में लिया गया तथा अवध के नवाब से मिले दोनो जिले इलाहाबाद एवं कारा, शाह आलम को दे दिये गये, बदले में सम्राट ने कम्पनी को बंगाल, बिहार एवं उडीसा की दीवानी स्थायी रूप से दिया history gk question and answer in hindi।

क्लाइव द्वारा इलाहाबाद की सन्धि तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप थी. उसने बढी चतुराई से कम्पनी को मराठों एवं अफगानों के अगले से बचाते हुए नवाब को मित्रता की सन्धि में बांध दिया तथा सम्राट को अंग्रेजों की कठपुतली बना दिया तथा कम्पनी को कानूनी रूप से बंगाल, बिहार एवं उडीसा का स्वामी बना दिया history gk question and answer in hindi।

बंगाल में व्यवस्था स्थापन

क्लाइय ने इलाहाबाद की सन्धि के द्वारा जटिल राजनीतिक समस्या का समाधान तो कर दिया, लेकिन उसे अब बंगाल में व्यवस्था स्थापित करने की चुनौती का भी सामना करना था। बंगाल में व्यवस्था स्थापित करने का जो समाधान क्लाइव ने निकाला उसे ही बंगाल में शासन की वैध प्रणाली कहा जाता है history gk question and answer in hindi।

द्वैध प्रणाली (Dual System)

मुगलों की प्रशासनिक प्रणाली में सूबे का शासन दो अधिकारियों के द्वारा होता था। पहला अधिकारी सूबेदार कहलाता था, जिसका कार्य शान्ति व्यवस्था, फौजदारी एवं सैनिक मामलों को देखना था। सूबे के दूसरे अधिकारी को दीवान कहा जाता था, जिसका प्रमुख कार्य कर व्यवस्था एवं दीवानी कानून देखना था history gk question and answer in hindi.

ये दोनो अधिकारी एक दूसरे से स्वतन्त्र किन्तु केन्द्र के अधीन होते थे, जिससे वे एक दूसरे को नियंत्रित करते थे। मुगलों की इस व्यवस्था को ही क्लाइव ने थोड़े परिवर्तन के साथ लागू किया। क्लाइव ने 26 लाख के बदले दीवानी का कार्य कम्पनी के ऊपर ले लिया तथा मीर जाफर की मृत्यु के बाद नजमु‌द्दौला को नवाब बनाने की अनुमति के बदले निजामत का कार्य भी कम्पनी के हाथी में केन्द्रित कर लिया history gk question and answer in hindi।

इस प्रकार निजामत एवं दीवानी दोनो का अधिकार कम्पनी के पास आ गया। कम्पनी ने अपने दीवानी कार्य के लिये बंगाल में मुहम्मद रजा खां एवं बिहार के लिये राजा शितान राय को उप दीवान नियुक्त कर दिया। अर्थात इन दो भारतीय अधिकारियों द्वारा ही कम्पनी ने अपना दीवानी कार्य शुरू किया। निजामत के कार्य वके लिये कम्पनी ने नवाब को 53 लाख रूपये देना स्वीकार किया। इस प्रकार कम्पनी ने बंगाल के शासन को इसी द्वैध शासन प्रणाली द्वारा चलाने का प्रयास किया history gk question and answer in hindi।

द्वैध शासन प्रणाली का प्रभाव

history gk question and answer in hindi तत्कालीन परिस्थित्तियों को ध्यान में रखते हुए क्लाइव द्वारा अपनायी गयी यह द्वैध शासन प्रणाली अंग्रेजों के लिये हितकर थी क्योंकि दैध शासन प्रणाली से कम्पनी का वास्तविक चेहरा छिपा ही रहा जिससे भारतीय राज्यों के अतिरिक्त यूरोपीय राज्य भी संगठित हो अंग्रेजों का विरोध न कर सके।

साथ ही भारतीय माल एवं रीति रिवाजों ने अनभिज्ञ अंग्रेजों के पास कर्मचारी एवं अधिकारी भी नहीं थे, जो इस कार्य को कर सकते थे। किन्तु बंगाल में रहने वाली जनता की दृष्टि से देखे तो यह शासन प्रणाली पूर्णतया खोखली, भ्रष्ट एवं विनाशक थी।

history gk question and answer in hindi द्वैध शासन प्रणाली के स्वरूप को प्रकट करते हुए सर जार्ज कार्नवाल ने ब्रिटिश हाउस आफ कामन्स में कहा था में निश्चय पूर्वक यह कह सकता हूँ कि 1785-84 तक ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सरकार से अधिक भ्रष्ट झूठी तथा बुरी सरकार संसार के किसी भी सभ्य देश में नहीं थी।

इस शासन प्रणाली का दुष्परिणाम जीवन के सभी क्षेत्रों में पड़ा। प्रशासन पूरी तरह से ठप्प एवं चौपट हो गया था। कम्पनी प्रशासन का उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं करती थी और नवाय के पास प्रशासन का सामर्थ्य नहीं था। डाकू एवं चोर दिन में लूट पाट करते थे, न्याय केवल विडम्बना मात्र रह गया। ( history gk question and answer in hindi ) भ्रष्ट अंग्रेज अधिकारी एवं उनके भारतीय मातहत गरीब जनता का रका चूस रहे थे।

इस शासन प्रणाली से अन्न एवं खाद्यान्न से भरपूर प्रदेश को उजाड़ बना दिया। कर संग्रह का कार्य अधिक बोली लगाने वाले को ठेके पर दिया जाने लगा, जिनका उद्‌देश्य अधिकाधिक कर संग्रह था। इस अधिक कर एवं इसके एकत्रित करने की कढ़ाई ने कृषकों को कृषि छोड़ने के लिये बाध्य किया। किसान अपनी भूमि एवं गांव छोड़कर जंगलो में भागने एवं छिपने को मजबूर हो गये history gk question and answer in hindi।

कृषि को अवनति ने व्यापार एवं वाणिज्य को भी प्रभावित किया। व्यापार एवं वाणिज्य पर अंग्रेजों का एकाधिकार हो गया, जिससे वे माल को कम से कम कीमत पर खरीदते एवं मनमाने दाम पर बेचते थे। भारतीय व्यापारी वर्ग धीरे धीरे नष्ट हो गया। अब वे व्यापारी से भिखारी बन गये।

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जो बंगाल अपने हस्त कुटीर उद्योगों के लिये विश्व प्रसिद्ध था, जहा के कारीगरों की कारीगरी और कौशल का सानी विश्य में कहीं नहीं मिलता था. यह बंगाल एवं उसके करीगर अन्न के लिये मोहताज हो गये। कपास, सिल्क एवं मलमल के कारीगरों को अंग्रेजों ने अपने काम करने के लिये बाध्य किया, जिन्होंने आनाकानी की उनके हाथ के अंगूठे काट लिये गये।

कारीगरों एवं जुलाहों को पेशगी के बदले वास बना लिया गया। इस प्रकार इस शासन प्रणाली ने बगाल के लोगों का बहुत कष्ट दिया, कृषि व्यापार, उद्योग सब नष्ट हो गये। बंगाल के लोगों का चारित्रिक एवं नैतिक पतन हुआ history gk question and answer in hindi।

क्लाइव द्वारा आन्तरिक सुधार

क्लाइन जब गवर्नर बन कर भारत आया तो उसके सम्मुख कंचल राजनीतिक व्यवस्था बनाने का कार्य ही नहीं था. अपितु उसके सामने कम्पनी के अधीनस्थ अंग्रेज कर्मचारियों एवं कम्पनी प्रशासन को सुधारने की भी चुनौती थी। क्लाइय इस सुधार के लिये दृढ़ था. उसने असैनिक क्षेत्र में उत्पन्न भ्रष्टाचार व घूसखोरी को समाप्त करने के लिये उपहार लेने एवं निजी व्यापार को प्रतिबन्धित कर दिया, किन्तु क्लाइव के इस कार्य का अंग्रेजों ने विरोध शुरू कर दिया।

कलराइय ने सैनिक क्षेत्र में सैनिकों को मिलने वाले दोहरे भत्ते को बन्द कर दिया क्योंकि इससे बंगाल के सैनिकों का वेतन मद्रास के सैनिकों से अधिक होता था। श्वेत अधिकारियों ने क्लाइव के इस निर्णय का विरोध करने के लिये सामूहिक त्याग पत्र की धमकी दी। लेकिन क्लाइव ने बिना डरे त्याग पत्र मजूर करते हुए नये लोगों को कमीशन देना प्रारम्भ कर दिया। मद्रास से कुछ अफसर बुलाये गये तथा क्लाइव ने निर्भीकता से सैनिक क्षेत्र में इन सुधारों को कार्यान्वित किया history gk question and answer in hindi।

क्ल्राइब 1767 में पुनः इंग्लैण्ड लौट गया। 1760 में जब यह इंग्लैण्ड पहली बार लौटा था तो इंग्लैण्ड में उत्तका विशेष सम्मान हुआ था तथा यह “लार्ड की उपाधि से विभूषित किया गया। किन्तु 1769 में जब वह इंग्लैण्ड पहुंचा तो उसका विरोध हुजा। उस पर रिश्वतखोरी. भ्रष्टाचार के अनेक आरोप लगा कर बदनाम किया गया history gk question and answer in hindi।

history gk question and answer in hindi हालांकि इंग्लैण्ड की पार्लियामेन्ट ने उसे इन आरोपों से मुक्त करते हुए उसके देशभक्ति की सराहना की। किन्तु इन आरोपों से क्लाइव इतना दुखी हुआ अथवा उसकी आत्मा ने भारत में उसके किये गये अनैतिक कार्यों से मुक्ति के लिये 1774 में आत्महत्या करने पर विवश किया ।

1767 से 1789 तक बेरेलस्ट एवं 1769 से 1772 तक कार्टियर बंगाल के गर्वनर रहे। किन्तु इन दोनो के काल में कम्पनी की स्थिति अत्यन्त शोचनीय हो गयी थी। द्वैध शासन के अधीन बंगाल की स्थित्ति अत्यन्त दयनीय हो गयी। किसान, मजदूर, व्यापारी सबका पतन हो रहा था।

history gk question and answer in hindi बंगाल में भयकर दुर्भिक्ष एवं महामारी ने बंगाल की जनता की पीड़ा को असहनीय बनादिया। कम्पनी के सेवक अपने स्वार्थ एवं भ्रष्टाचार में इतने लिप्त थे कि ऐसी विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने बलपूर्वक अभिक लगान वसूला।

बंगाल को इस दुगर्ति से उबारने तथा कम्पनी की साथख को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिये वारेन हेस्टिंग्स को 1772 में बंगाल का गर्वनर नियुक्त किया गया। अपने 12 वर्ष के शासन काल में वारेन हेस्टिंग्स ने इस उत्तरदायित्व को योग्यता पूर्वक निभाया जिसके कारण कुछ इतिहासकार ब्रिटिश साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक वारेन हेस्टिंग्स को ही मानते हैं history gk question and answer in hindi।

क्लाइव का मूल्यांकन

history gk question and answer in hindi सामान्य परिवार में जन्मा व्यक्ति जिसने जीवन की शुरुआत साधारण पद से की हो और जो सर्वोच्च पद को सुशोभित किया हो वह व्यक्ति साधारण नहीं हो सकता। उपरोक्त बातें क्लाइय को असाधारण बना देती हैं। क्लाइव के मूल्यांकन में इतिहासकारों में मतैक्य नहीं है। उसका कारण दृष्टिकोण का अन्तर है।

history gk question and answer in hindi अंग्रेजों के दृष्टिकोण से देखें तो कलाइय ही वह व्यक्ति है जिसने अर्काट का घेरा डाला और फ्रांसीसियों से अंग्रेजों को बचाया। बंगाल में उसने मुट्ठी भर अंग्रेजी सेना की मदद से प्लासी का युद्ध जीतकर अंग्रेजी सत्ता की नीव डाली।

एडमण्ड वर्क ने लिखा है “लार्ड क्लाइव ने स्वयं तो अज्ञात गहराई वाली नदी को अत्यन्त कठिनता से पैदल ही पार किया, परन्तु वह अपने उत्तराधिकारियों के लिये एक ऐसा पुल तैयार कर गया, जिस पर लंगडे भी चल सकें और अन्धे भी अपना रास्ता टटोल सकें अपने विशेष गुणों के कारण क्लाइव उस अभिनय के लिये असाधारण रूप से उपयुक्त था, जो उसे भारतीय रंगमंच पर करना था।

history gk question and answer in hindi तनिक तीखी तात्विक शक्ति और अनश्धक उत्साह यही दो विशेषताओं ने उसे एक साम्राज्य का सच्या संस्थापक बना दिया।”

अलफ्रेड लायल के अनुसार अंग्रेज लोग भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव के लिये अन्य व्यक्तियों से अधिक इस ऊंची उत्तेजना बाले, साहसी तथा अजेय व्यक्ति के ऋणी है।

history gk question and answer in hindi लार्ड मैकाले ने मलाइव के कार्य एवं उससे उपजे परिणाम को संतुलित करते हुए लिखा है जन मनुष्यों की भांति जो जन्मजात तीव्र उत्तेजना एवं प्रलोभनों से प्रेरित होते हैं, क्लाइव ने भी बहुत सी मूले की परन्तु प्रत्येक व्यक्ति जो उसके समस्त जीवन पर न्याय संगत तथा पक्षपात रहित दृष्टि डालेगा .

उसे स्वीकार करना होगा कि हमारे द्वीप, जिसने बहुत से वीरों को जन्म दिया है, ने बिरले ही इतने महान व्यक्ति को जो शास्त्रों से तथा सूझबूझ से अलंकृत हो, जन्म दिया है। क्लाइव के भारत में दूसरे आगमन से हमारा राजनैतिक उत्कर्ष आरम्भ होता है। इतना विशाल उर्वर प्रदेश, इतना अधिक कर इतनी अधिक प्रजा अंग्रेजों के अधीन कभी नहीं हुई।”

इस प्रकार अंग्रेजों को हुए लाभ की दृष्टि से बलाइव महान है, किन्तु यदि हम भारतीयों की दृष्टि से बात करें तो क्लाइव अजेय तो थार, किन्तु उसने कोई युद्ध कौशल एवं वीरता से नहीं बल्कि छल. प्रलोभन एवं घोखे से जीता। उसमें अनेक मानवीय दुर्बलताएं थी। वह मन लोलुप, कुचक्री, विश्वासघाती एवं कपटी था history gk question and answer in hindi।

क्लाइव ने भारतीय जनता के हितों की अनदेखी की, उसके द्वारा स्थापित द्वैध शासन व्यवस्था ने भारतीयों को अकथनीय कष्ट एवं क्षति पहुंवाई। के०एम० पन्निकर ने लिखा है कि राम 1785 से 1772 तक कम्पनी ने बंगाल में डाकुओं का राज्य स्थापित कर दिया तथा बंगाल को अविवेकी ढंग से जुटा। इस अवधि में अंग्रेजी साम्राज्य का सबसे भाँडा रूप देखने को मिला तथा बंगाल की जनता ने बहुत दुःख उठाया history gk question and answer in hindi।

प्रायः यह कहा जाता है कि भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना का उ‌द्देश्य शान्ति एवं व्यवस्था बनाना था। यदि हम इस कथन पर ध्यान दे तो इस कार्य में क्लाइय का कोई योगदान नहीं था। वस्तुतः उसके कार्य से व्यवस्था की जगह अव्यवस्था ही फैली history gk question and answer in hindi।

अन्ततः कहा जा सकता है कि यद्यपि उसने अपने देश का महान हित किया, ( history gk question and answer in hindi Top 100 Questions in hindi किन्तु इस कार्य में उसने बेईमानी, छल-कपट एवं विश्वासघात का सहारा लिया। लाभ के लिये अनैतिक साधनों का प्रयोग करने पाला व्यक्ति कभी भी महान नहीं हो सकता।

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