प्रस्तावना
भारत में यूरोप से व्यापार करने हेतु यूरोप की चार प्रमुख जातियां भारत आयी। सर्वप्रथम भारत में पुर्तगालियों का आगमन हुआ और इन्होने पूर्वी व्यापार पर एक शताब्दी तक नियन्त्रण करते हुये खूब মন कमाया history gk in hindi।
इसके बाद दयो का पूर्व में आगमन हुआ डयो ने पुर्तगालियों के व्यापारिक अधिकारी को समापत करते हुये गर्म गसलों के द्वीपों पर नियन्त्रण स्थापित कर लिया। बचों के बाद अग्रेजों ने पूर्वी व्यापार में सक्रियता से भाग लेना शुरू किया और शीघ्र ही पुर्तगालियों एवं कथी से व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में बहुत आगे निकल गये history gk in hindi।

पूर्व के व्यापार में फ्रांसिसीयों का आगमन सबसे बाद में हुआ। भारतीय व्यापार की प्रतिद्वन्दिता एवं उपनिवेश स्थापना तथा राजनीतिक प्रमुखता के प्रश्न पर अंग्रेजी एवं फ्रांसिसीयों के मध्य संघर्ष हुआ। दोनो यूरोपीय शक्तियों का संघर्ष दक्षिण भारत के कर्नाटक में प्रारम्भ हुआ जिसमें अंग्रेजो ने फ्रांसिसीयों को परासा करते हुए भारतीय व्यापार एवं राजनीति से बाहर कर दिया।
उद्देश्य
इस पात के अध्ययन का उद्देश्य निम्न है-
- 1-भारत में यूरोपीयों का व्यापारिक अगामन एवं उनके मध्य व्यापारिक प्रतिस्पर्धा एवं एकाधिकार प्राप्त कर अधिकाधिक मुनाफा कमाने की प्रवत्ति ने एक दूसरे को कैसे समाप्त करने का प्रयास किया।
- 2 अंग्रेजो एवं फ्रांसिसीयो के मध्य संघर्ष के कारणों एवं यूरोप में इन दोनों देशों के माध्य पारिस्परिक संबंधो का इनके क्रिया-कलापों एवं व्यवहारों ने कितना प्रभाव पड़ता था।
- 3-दक्षिण भारत की राजनीतिक दशा का परीक्षण करना।
- 4- इस सघर्ष में फ्रांसिसीयों की असफलता के कारणो को समझने में असानी होगी।
ऑग्ल फ्रांसिसी संघर्ष का कारण
आग्ल फासिसीयों के मध्य संघर्ष का मूलतः निम्न कारण था।
व्यापारिक एकाधिकार की स्थापना का प्रयास भारत में आने वाले यूरोपीय कम्पनियों का प्रारम्भिक उद्देश्य व्यापार करके अधिकाधिक धन जमाना था।
यह तनी सन्भव था जब किसी एक का व्यापार पर एकाधिकार प्राप्त हो जाय और यह अन्य कम्पनियों को अपने मार्ग से हटा दे जिससे वह अपना माल न्यूनतम दाम पर खरीद सके और उसे अधिकराम भाव में बेथे। इसी व्यापारिक एकाधिकार प्राप्त करने की चेष्टा ने अंग्रेजों एवं फ्रांसिसीमों को एक दूसरे का शत्रु बना दिया।
17वीं शताब्दी के अन्त तक पुर्तगालियों उचों एवं अंग्रेजों के माय होने वाला त्रिकोणीय व्यापारिक संघर्ष समाप्त हो गया था और अंग्रेजो को इसमे विजय प्राप्त हो गयी थी इरा संघर्ष के बाद ही फांस ने व्यापारिक एवं औपनिवेशिक क्षेत्र में पदार्पण किया जिससे फ्रांस एवं अंग्रेजो के मध्य प्रतिद्वन्दिता अवश्यम्भावी हो गयी history gk in hindi।
17वी, 18वी शताब्दी में अंग्रेज एवं फ्रांसिसी एक दूसरे के शाक्यात शत्रु थे। यूरोप में जब भी इन दोनो देशो के मध्य युद्ध छिड़ता, संसार के उस हर कोने में जहां दोनों देशों की कम्पनियों होती पे आपस में टकरा जाती थी। वाल्टेयर का कथन था कि हमारे देश में चलने वाली पहली गोली अमेरिका और एशिया के तोप खानों में दिया सलाई दिखा देता है history gk in hindi।
भारत की कमजोर केंन्द्रीय सत्ता इस संघर्ष का एक प्रमुख कारण है। क्योंकि जय तक भारत पर मुगली का शासन हठ एवं शक्तिशाली था तब तक में विदेशी व्यापारी नियन्त्रण में थे। मुगलों के पतन से भारत की राजनीतिक स्थिरता नष्ट हो गयी फलतः इस अराजक स्थिति में विदेशी कम्पनियां बेलगाम हो गयी और आपस में संघर्ष करने लगी।
कर्नाटक की बिगड़ती राजनीतिक दिशा ने भी अंग्रेजो एवं फ्रांसिसीयों का एक दूसरे से संघर्ष के लिये प्रेरित किया। अतः यहां कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति को समवाना आवश्यक है history gk in hindi।
मुगली के कमजोर होने की स्थिति में दक्षिण भारत में दो प्रमुख राजनीतिक शक्ति थे मराठे एवं हैदराबाद के निजाम। लेकिन इनके अलावा भी छोटे-छोटे हिन्दू राजाओं एवं मुस्लिम नवाबों का दक्षिण भारत मे शासन था history gk in hindi।
दक्षिण की इन छोटी-बड़ी राजनीतिक शक्तियों के मध्य राजनीतिक द्वेष एवं आपसी संघर्ष ने दक्षिण भारत को युद्ध एवं षड्यन्त्र का मैदान बना दिया था। दक्षिण भारत का एक प्रमुख्य राजनीतिक शक्ति हैदराबाद राज्य था जिसकी स्थापना निजामुल मुल्क आराफ जाह ने की थी history gk in hindi।
आसफ जाह एक महत्यशकांक्षी एवं योग्य मुगल सरदार था मुगल सम्राट मुहम्मद शाह के समय में इसने दक्षिण में आकर हैदराबाद में अपने को स्वतंत्र बना लिया। तथा छोटे-छोटे दक्षिण के मुगल क्षेत्रों का स्वामी बन गया। 1748 में आसफ जांह की मृत्यु से हैदराबाद राज्य में उत्तराधिकार के प्रश्न पर आसफजाह के पुत्र नासिर जंग एवं पौत्र मुजफ्फरजंग के मध्य संघर्ष शुरू हो गया।
कर्नाटक एवं त्रिचना पल्ली
मद्यपि आसफ जाह दक्षिण के समस्त मुगल क्षेत्रों के स्वामी होने का दावा करता था तथापि कर्नाटक का नवाब दोस्त अली निजाम की अधीनता का दिखाया करते हुए कर्नाटक पर स्वतन्त्रता पूर्वक शासन कर रहा था। कर्नाटक की राजबानी अर्काट थी।
कर्नाटक में अधीन ही त्रिचना पाल्ली का एक छोटा हिन्दू राज्य था जिसे दोस्त अली के दामाद चाँया साहब ने हिन्दू रानी से विवाहोपरान्त प्राप्त कर लिया था history gk in hindi।
1741 में दोस्त मुहम्मद की मृत्यु के बाद उसका पुत्र सफदर अली कनार्टक का नवाब बना किन्तु इसके चचेरे भाई मुर्तजा अली ने षड्यन्त्र कर सफदर अली की हत्या कर दी एवं स्वयं नवाब बन गया किन्तु अर्काट की जनता ने मुर्तजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया जिससे मुर्तजा अली को मेष बदलकर भागना पड़ा history gk in hindi।
पुन सफदर अली के अल्प वयस्क पुत्र मुहम्मद अली को नवाब बनाया गया। कर्नाटक के इस अशाना माहौल का फायदा उठाते हुए निजाम ने कर्नाटक में हस्तक्षेप किया तथा वहां अपने समर्थक अनवरुद्दीन को मुहम्मद अली का संरक्षक बना दिया। अवसर देखकर अनवरूद्दीन ने मुहम्मद अली की हत्या कर दी तथा स्वयं नवाब बन बैठा। इन्हीं आन्तरिक एवं उत्तराधिकार के संघर्षों अंग्रेजो तथा फ्रांसिसीयों के मध्य प्रथम कर्नाटक युद्ध छिड़ा।
कनार्टक का प्रथम युद्ध (1746-48)
कर्नाटक के प्रथम युद्ध का कारण 1740ई० में इग्लैण्ड एवं फ्रांस के बीच यूरोप में आस्ट्रिया के उत्तराधिकार के प्रश्न को लेकर हुआ सघर्ष था। परिणामस्वरूप विश्व में जहां भी दोनों जातियां थी वही संधर्ष प्रारम्भ हो गया। शुरुआत अंग्रेजों की तरफ से हुई, अंग्रेज कप्तान वारनेट ने कुछ फासिसी जलपोत पकड़ लिये।
पांडिचेरी का नवनियुक्त गर्वनर डूप्ले ने माशीशस के फ्रांरिस्सी गर्वनर ला-वृोंने से सहायता मांगी। ला बूढौने 3000 सैनिकों के साथ कोरो मण्डल तट की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसने अंग्रेजी नौसेना को परास्त कर दिया फ्रांसिसीयों ने जल एवं थल दोनो ओर से मदास को घेर लिया history gk in hindi WITH ANSWERS TOP 100 QUESTIONS।
सूप्ले ने कर्नाटक के नवाब अनवरूद्दीन को मद्रास देने का प्रलोभन देकर अपनी और कर लिया 21 सितम्बर 1746 को मद्रास ने आत्म समर्पण कर दिया। यह स्मरण करने योग्य है कि इन युद्ध वन्दियों में कलाइव भी एक था। इसी समय दूप्ले एवं लागूडौन के बीच मतभेद हो गया। लाबूोंने एक अच्छी फिरौती के बदले मद्रास को लौटाना चाहता था जबकि ठूग्ले मद्रास को फ्रांसिसीयों के अधीन करना चाहता था।
( history gk in hindi top 100 questions important in hindi )लावूोंने एक ऊंची कीमत पर मद्रास अंग्रेजों को बेच दिया। किन्तु डूप्ले ने इसको स्वीकार नहीं किया तथा पुनः मद्वास पर अधिकार कर लिया। परन्तु वृप्ले फोर्टसेंट डेविड जो पाठचेरी से 18 मील दूर था को जीतने में असफल रहा।
दूसरी ओर अंग्रेजी कमाण्डर वास्कोवे के नेतृत्व में अंग्रेजों ने पांडिचेरी पर घेरा डाल दिया, किन्तु फासिसीयों ने बिना समुद्री सहायता के पास्को के इस प्रयास को विफल कर दिया। मद्रास को फ्रांसिसी संरक्षण में देखकर कर्नाटक के नवाब अनवरूद्दीन ने पूर्व शर्त के अनुसार डूप्ले से मद्रास की मांग की किन्तु यूप्ले अपनी बात से मुकर गया जिससे कुछ क्षुब्ध होकर नवाब ने एक बड़ी सेना फ्रांसिसीयों के विरूद्ध भेजी।
नवाब की इस भेजी सेना को दूप्ले ने सेट टीम के युद्ध में पराजित कर दिया। कर्नाटक का यह पहला युद्ध सेंट टीमें के युद्ध के लिये विशेष रूप से प्रसिद्ध है। सेंट टोमे या अड़यार का युद्ध पहला युद्ध है जो किसी भारतीय सेना एवं यूरोपीय सेना के बीच हुआ इस युद्ध में कैप्टन पैराडाइज के नेतृत्व में एक छोटी सी फ्रांसिसी सेना जिसमे 230 फ्रांसिसी तथा 700 भारतीय सैनिक थे, ने महफूज खां के नेतृत्य में 10000 भारतीय सेना को आसानी से पराजित कर दिया history gk in hindi।
इस युद्ध ने तोपखाने से सुसज्जित अनुशासित यूरोपीय सेना का मुख्यतः घुसड़वार युक्त डीली एवं असंगठित भारतीय सेना पर श्रेष्ठता साबित कर दिया इस युद्ध ने ही भारत में यूरोपीय राजनीतिक नियन्त्रण की नींव डाली क्योंकि युद्ध का परिणाम अप्रत्याशित एवं अचम्मित करने वाला था history gk in hindi।
यूरोप में युद्ध बन्द होते ही कर्नाटक का यह प्रथम युद्ध समाप्त हो गया एक्स ला शापेल 1748 की सन्धि के द्वारा दोनो शक्तियों के मध्य समझौता हो गया तथा परस्पर जीते हुये प्रदेश एक दूसरे को दे दिये गये। प्रो० 315 वेल के अनुसार “1748ई0 की एम्स ला शायेल की सन्धि भारत के इतिहास में एक नये युग का द्योतक है।
इससे समुद्री शक्ति के प्रभाव का प्रदर्शन हुजा एवं भारतीय युद्ध पद्धति पर यूरोपीय युद्ध पद्धति की सपालता का प्रदर्शन हुआ। इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय राज्यों के हृदय में कौन सा राजनैतिक विनाश धुन की भाँति अपना कार्य कर रहा है history gk in hindi।
कर्नाटक के प्रथम युद्ध एवं सन्धि डूप्ले के प्रयानों पर तुषारापात किया फासिसीयों को हुए सारे लाम छिन गये किन्तु फिर भी भारत में फासिसीयों की धाक जम गयी। इस युद्ध रो यूरोपीयों की तुलना में भारतीय सेना की दुर्बलता प्रकट हो गयी जिससे बाद में कर्नाटके के आन्तरिक संघों में दोनो शक्तियों ने हस्तक्षेप की नीति का अनुराराण करना प्रारम्भ किया history gk in hindi।
कर्नाटक का द्वितीय युद्ध (1749,-54)
कनार्टक का द्वितीय युद्ध प्रथम युद्ध के समान दोनो शक्तियों में प्रत्यक्ष रूप से नहीं हुआ वरन भारतीयों के आपसी संधी से लाम उठाने के उपक्रम ये दोनों शक्तियों में अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष हुआ। इस समय दक्षिण भारत में मराठे एवं मुस्लिम नवानों के भव्य श्रेष्ठता की जंग छिडी थी जिसमें हैदराबाद कर्नाटक की गद्दी के उत्तराधिकारी के प्रश्न ने इसे और उलझा दिया।
कर्नाटक के प्रथम युद्ध ने डूप्ले की राजनैतिक महत्वाकांक्षा को जगा दिया था जब उसने भारतीय झगड़ो के माध्यम से फासिसी प्रभाव जमाने की सूची। मालेसन ने इसे जो लिखा महत्वाकाँक्षाएं जाग उठी परस्पर द्वेष बढ़ गये। जब बढ़ते हुए प्रभाव की आकाक्षीए द्वार खटखटा रही थी तो उन्हें (गूरोपीयों को) शान्ति से क्या लेना देना history gk in hindi।
इस समय कर्नाटक, हैदराबाद तथा तन्जीर तीनों राज्यों में उत्तराधिकार के लिये संघर्ष बल रहा था।
कर्नाटक में नवाब दोस्त अली के पौत्र मोहम्मद अली की हत्या कर अनवरूद्दीन नयाब के रूप में शासन कर रहा था किन्तु भूतपूर्व नवाब दोस्त अली का निकट सम्बन्धी चौदा साहब जी त्रिचनापल्ली पर राज्य कर रहा था, कर्नाटक की गद्दी प्राप्त करना चाहता था परन्तु वह स्वयं इस समय मराठों का कैदी एवं सतारा में बन्दी था history gk in hindi।
चाँद साहब ने मुजफ्फर जंग (जो हैदराबाद गद्दी का दावेदार था) से एक दूसरे की सहायता का वचन लेते हुए इप्ले से सहायता मांगी डूप्ले ने इसे अवसर के रूप में देखा और सहायता का वचन दे दिया। हैदराबाद राज्य की नींव डालने वाला चिनकिलिय खॉरिज जिसे निजामुल मुल्क की उपाधि प्राप्त थी की 21 मई 1748 को मृत्यु हो गयी।
नवाब का पुत्र नासिर जंग नयाब बन गया किन्तु इसके नतीजे अथवा मान्ने मुजफ्फर जंग ने इस दावे को चुनौती दी मुजफ्फरजंग ने मजबूती के लिये चाँद साहब से परस्पर सहायता का समझौता कर लिया। तंजौर में गद्दी के लिये मराठों के मध्य संघर्ग बल रहा या जिसमें अंग्रेजो की सहायता से शाहजी गद्दी पर बैठने में सफलता पायी थी history gk in hindi।
युद्ध का घटनाक्रम
चौदा साहब के द्वारा सहायता मांगी जाने पर डूप्ले ने उसे सहायता देकर मराठो की कैद से मुक्त करवा लिया। अब दूप्ले, चॉद साहब एवं मुजफ्फर जंग की सम्मिलित सेना ने नवाब अनवरूद्दीन को अगस्त 1748 में वेल्लोर में नजदीक अम्बर अथया अम्बूर के स्थान पर हराकर गार दिया।
अनवरूद्दीन का पुत्र अर्काट छोड़कर त्रिचना पल्ली भाग गया अतः कर्नाटक अब चोदा साहब के हाथ में आ गया जिसके बदले उसने फासिसीयों को पाँडिचेरी के निकट 80 गाँव मेंट में दिया अब डूप्ले की नीति सफल होती प्रतीत होने लगी। जिससे घबराकर अंग्रेजों ने अनवरूद्दीन के पुत्र एवं हैदराबाद में नासिर जंग का साथ देने का फैसला किया history gk in hindi।
और दोनो को राहायता भेजी। अंग्रेजी सहायता की मदद से नासिर जंग युद्ध के लिये कर्नाटक की ओर बढ़ा उसने चोंदा साहब को अकार्ट से भगा दिया तथा मुजफ्फर जंग ने जात्म समर्पण कर दिया कि अब स्थिति अंग्रेजी के पक्ष में हो गयी किन्तु दूप्ले इससे हतोत्साहित नहीं हुआ उसने नासिरजंग के विरुद्ध एक सेना भेजी जिससे एक झड़प में दिसम्बर 1750 को नारिरर जंग मारा गया।
जब डूप्ले ने मुजफ्फर जंग को बन्दी गृह से मुक्त कर हैदराबाद को नवाब बना दिया। कृतार्थ गुजफ्फरजंग ने फारािशीयों को बहुत सा प्रदेश, धन् एवं सूप्लू को राजा की उपाधि प्रदान की। दूप्ले ने दुस्सी की अध्यक्षता से एक फ्रेंच सैनिक टुकड़ी मुजफ्फरजंग की सहायता के लिये हैदराबाद में तैनात कर दिया।
1751 में चौदा साहब कर्नाटक के नवाब बन गये यूप्ले इस समय अपनी शक्ति के चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया। फ्रांसिसीयों की इस सफलता से अंग्रेजो की स्थिति डावाडोल हो गयी। अब डूप्ले का केवल एक शान्नु अनवरूद्दीन का पुत्र त्रिचला पल्ली में शरण लिये हुआ था.
डूप्ले एवं चौदा साहब की सेना ने त्रिचना पल्ली पर घेरा डाल दिया यद्यपि उन्हे त्रिचना पल्ली को जीतने में सफलता नही मिली। तथापित अंग्रेजी सेना भी फासिसी घेरे को तोराने में असफल रही। ऐसी विषम स्थिति में क्लाइव ने त्रिचना पल्ली पर दबाव कम करने के लिये केवल 210 सैनिको की सहायता से अंकार्ट पर घेरा डाला और उसे जीत लिया history gk in hindi।
चान्दा साहब द्वारा भेजी गयी 4 हजार की सेना भी अकार्ट को अपने अधीन नहीं कर पायी। कलाइय ने मुट्ठी भर सेना के साथ 53 दिनों तक इस सेना का प्रतिरोध किया। इससे फ्रांसिसी प्रतिष्या पर गहरा आघात लगा। 1752 में स्ट्रिंगर लारेन्स के नेतृत्व में एक दूसरी अंग्रेज सेना त्रिचना पल्ली पहुंच गयी जून 1752 में त्रिचना पल्ली पर घेरा वाली फासिसी सेना ने हथियार डाल दिये। चाँदा साहब तन्जीर भागा जहां बोखे से उसकी हत्या हो गयी।
त्रिचना पल्ली की इस पराजय ने दूप्ले के भाग्य का सर्वनाश कर दिया। फासिसी कम्पनी के डाइरेक्टरों ने इन युद्धों में व्यय हुए धन एवं हानि का जिम्मेदार डूप्ले को मानता उसे वापस बुला लिया। 1754 में गोडेडू को मारत में फ्रांसिसी गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया 1755 में दोनों कम्पनियों के बीच पाडियेरी की एक अस्थाई सन्धि हो गयी history gk in hindi।
इस सन्धि के द्वारा दोनों शक्तियों ने देशी नरेशो के संघर्ष में हस्तक्षेप न करने का निर्णय लिया। यह भी निश्चित किया गया कि जब तक यूरोप में शान्ति रहे, भारत में भी शान्ति बनाए रखी जायेगी। और किसी नये दुर्ग का निर्माण नहीं किया जायेगा।
इस प्रकार कर्नाटक युद्ध को दूसरे दौर भी अनिर्णित रहा। थल पर अंग्रेजी सेना की प्रधानता सिद्ध हुई उनका प्रत्याशी मोहम्मद अली (नवाब अनवरूद्दीन का पुत्र) कर्नाटक का नवाब बन गया परन्तु हैदराबाद में फासिसी अभी भी जमे रहे मुजफ्फर जंग की मृत्यु के बाद फासिसीयों ने सलावतजंग को नयाब बना दिया तथा और भी धन प्राप्त किया इस दूसरे युद्ध से फासिसी प्रतिष्ठा को कुछ ठेस पहुंची तथा अंग्रे जो की स्थिति दूढ हुई history gk in hindi।
कुछ इतिहासकारों के अनुसार 1754 की सन्धि पर हस्ताक्षर कर गोळेहू ने वह अपना सब कुछ बलिदान कर दिया जिसके लिये डूप्ले ने संघर्ष किया था। स्वय डूप्ले ने गोदेह पर यह आरोप लगाया कि उसने देश के जाति के विनाश और अपमान पर हस्ताक्षर किये history gk in hindi।
कर्नाटक का तीसरा युद्ध (1756-1763)
सन 1756 में यूरोप में सप्त वर्षीय युद्ध आरम्भ हो गया फलतः भारत में भी शान्ति समाप्त हो गयी दोनो शक्तियों ने युद्ध की तैयारियों शुरू कर दी फ्रांसिसी सरकार ने अप्रैल 1757 को काउन्ट डी लाली को गर्वनर एवं कमाण्डर इन चीफ बना कर भारत भेजा जो लगभग 12 महीने की यात्रा के बाद 1758 में भारत पहुंचा इस बीच अंग्रेजों ने बंगाल में प्लासी के युद्ध में सिराज को हरा दिया तथा गीर जाफर की बंगाल का नवाब बना दिया।
बंगाल में अंग्रेजो की इस सफलता एवं बंगाल में सत्ता परिवर्तन से अंग्रेजो को अकूत धन की प्राप्ति हुई। अब अंग्रेजो के सामने धन की कोई चिन्ता नही थी दूसरी ओर नवनियुक्त फासिसी रोनापति लाली अत्यन्त वीर एवं योग्य व्यक्ति था किन्तु उग्र स्वभाव एवं हठी होने के कारण उसे असफलता मिली लैली के सामने एक प्रमुख रामरया भन की थी इसलिये फ्रांसिसी सरकार ने यह आदेश देकर भेजा था कि वह भारत के राजाओं के मामले में हस्तक्षेप न करें अपितु अंग्रेजी व्यापार का विनाश करें।
लेली के आते ही युद्ध आरम्भ हो गया 1758 में ही लाली ने फोर्ड सेंट डेविड जीत लिया तथा तंजौर पर बकाया 50 लाख न मिलने के कारण उस आक्रमण कर दिया किन्तु तंजौर अभियान सफल न हो सका अब लाली ने मद्रास का मेरा डाल दिया किन्तु एक शक्तिशाली नौसेना के आने पर उसे मद्रास का घेरा उठाना पड़ा history gk in hindi।
लाली ने अब हैदराबाद से दुस्सी को वापस बुला लिया यह उसकी भयंकर भूल थी क्योंकि पुस्सी के हटते ही हैदराबाद पर फासिसी प्रभाव समाप्त हो गया। लाली के क्रोधी एवं दुव्र्व्यवहार से बुब्ध होकर फासिसी जहाजी बड़े का प्रधान, भारत छोड़कर मारीशस चला गया history gk in hindi।
फलतः अंग्रेजी बेड़े ने पोकाक के नेतृत्व में क्रासिसी बेड़े को तीन बार पराजित किया तथा भारतीय सागर से लौटने के लिये पाहय किया। इससे अंग्रेजी विजय स्वष्टतः दिखने लगी। 1760 में सर आयर कूट ने वाण्डिवास नामक स्थान पर फासिसी सेना को बुरी तरह परास्त किया तथा पुस्सी को बन्दी बना लिया तथा पौडिचेरी की किलेबन्दी नष्ट कर दी इस प्रकार फ्रांस की शक्ति का आधार ही नष्ट हो गया history gk in hindi।
इस युद्ध का समापन 1783 में पेरिस की सन्धि द्वारा हुआ इस सन्धि ने फ्रांसिसीयों के भारत में साम्राज्य स्थापित करने के स्वान को छिन्न-मिन्न कर दिया। इस प्रकार युद्ध का तीसरा चरण पूर्णरूप से निर्णायक सिद्ध हुआ history gk in hindi।
पेरिस सन्धि से पीडिचेरी, शॉसिसीयों को मिल तो गया किन्तु इसकी किले बन्दी नष्ट कर दी गयी पांडिचेरी के अतिरिक्त माही, कराइकल एवं चन्द्र नगर फ्रांसिसीयों को वापस कर दिया गया किन्तु वहां कोई दुर्ग का निर्माण नहीं हो सकता था तथा अब स्पष्टतः भारत में इन का पत्ता साफ हो चुका था ईश्वरी प्रसाद के अनुत्सार अब केवल भारतीय शक्तियों से अंग्रेजों को निपटारा करना शेष रह गया।
फ्रांसिसियों की असफलता के कारण
डूप्ले के नेतत्य में फासिसियों ने एक समय में अपनी राजनैतिक विजयों से भारतीय राजनीतिक मंच को हतप्रम कर दिया तूप्ले की अप्रत्याशित सफलता से यूरोप में खलवली मच गयी परन्तु इसके बाद भी फ्रांसिसी अन्ततः हार गये और भारतीय रंगमंच से विलुप्त हो गये। फ्रांसिसीयों की यह पराजय आकस्मिक एवं अकारण नहीं थी अपितु इस पराजय के पीछे कई कारण छिपे ये जो निम्न है-
फ्रांस का यूरोप को अधिक महत्व देना
प्राचीन समय से फास यूरोप का एक सर्व प्रमुख देश था। 18वी शताब्दी में फासिसी सम्राट अपनी प्राकृतिक सीमा स्थापित करने के उद्देश्य से अपने पड़ोसियों इटली, बेल्जियम एवं जर्मनी से युद्धों में उलझे हुए थे। फासिसी सम्राटों की इस यूरोपीय महत्वाकाक्षा के कारण उनके आर्थिक साधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता था history gk in hindi।
वास्तव में फासिसीयों को यूरोप में कुछ वर्ग मील क्षेत्र की अधिक चिन्ता थी और भारत एवं उत्तरी अमेरिका के हजारों वर्ग मील की चिन्ता कम थी। इग्लैण्ड प्राकृतिक रूप से यूरोप के मुख्य भूमि से अलग है। इसलिये इग्लैंड अपने आपको यूरोप से अलग मानता था और उसकी यूरोप में प्रसार की कोई इच्छा नहीं थी history gk in hindi।
यूरोप में इग्लैण्ट की भूमिका हमेशा शक्ति सन्तुलन बनाए रखने की होती है। इसलिये यूरोप के वागढ़ो से दूर इग्लैण्ड की भूमिका हमेशा शक्ति सन्तुलन बनाए रखने की डोती है इसलिये यूरोप के झगड़ो से दूर इग्लैण्ड एक चित्त होकर अपने व्यापार एवं उपनिवेश निर्माण में लगा रहा तथा नौसैनिक श्रेष्ठता के बल पर उसने भारत एवं उत्तरी अमेरिका में फांस को पछाड़ दिया history gk in hindi।
दोनों देशों की प्रशासनिक भिन्नताएं
फ्रांस एवं इग्लैण्ड की शासन प्रणाली में बढी मिन्नता थी जहां फांस में शासन पूरी तरह स्वेच्छाचारी निरंकुश राजाओं के हाँथ में था वही इग्लैण्ड में एक जागरूक अल्पतंत्र शासक कर रहा था। फासिसी इतिहासकारों ने फ्रांस की असफलता के पीछे अपनी घटिया शासन प्रणाली को ही अधिक जिम्मेदार ठहराया है history gk in hindi।
युर्वी वंश के अधीन महान लुई चौदष्ठये के निरन्तर युद्धों ने फांस की आर्थिक स्थिति खराब कर दी लुई चौहवे के अयोग्य उत्तराधिकारियों ने इस स्थिति को सम्मालने की जगह अपने ऐशो आराम विलासिता पर मनमाना खर्च किया जिससे फ्रांस की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी history gk in hindi।
इस आर्थिक विपन्नता की स्थिति में जब कम्पनी को पन की आवश्यकता हुई तो वह पूरी न की जा सकी। अलमेड लायल के अनुसार डूप्ले की वापसी लावोवनि तथा 5 आश की भूले, लाली की अदम्यता, इत्यादि से कहीं अधिक लुई मन्द्रहवे की भ्रान्तिपूर्ण नीति तथा उसके अक्षन मंत्री फ्रांस की असफलता के लिये उत्तरदायी थे history gk in hindi।
दोनों कम्पनियों के गठन एवं प्रकृति में असमानता
दोनो कम्पनियों के निर्माण प्रशासन एवं कार्यप्रणाली में बड़ा अन्तर था। यह भिन्नता भी फ्रासीसीयों के असफलता का एक बड़ा कारण था। फासीसी कम्पनी एक सरकारी कम्पनी थी जिसका 66 लाख फेंक की पूँजी से निर्माण किया गया जिसमे 35 लाख सम्राट ने लगाए थे history gk in hindi।
कम्पनी के डायरेक्टर सरकार द्वारा मनोनीत होते थे तथा लाभांश की सरकार गारंटी देती थी, अतएव कम्पनी के लोगों को इसकी समृद्धि की कोई विशेष आकांक्षा नहीं थी। यह कम्पनी 1721 से 1740 तक उधार के बन से व्यापार करती रही तथा सरकारी आर्थिक मदद से जैसे तैसे कम्पनी को चलाया जा रहा था history gk in hindi।
उदासीनता का आलम यह था कि कम्पनी के डायरेक्टरों की 1725 से 1765 के बीच एक भी बैठक नहीं हुई थी। ऐसी कम्पनी झूले की महत्याकक्षाएं एवं युद्धो के लिये धनापूर्ति करने में सक्षम नहीं थी। दूसरी ओर अग्रेजी कम्पनी एक निजी कम्पनी थी तथा इसमें कर्मचारियों में कार्य को उत्साह पूर्वक आगे ले जाने की उत्कट अभिलाषा थी history gk in hindi।
अपनी कम्पनी की समृद्धि को बनाए रखने के लिये वे हर सम्भव कोशिश करते थे क्योंकि उनकी अपनी समृद्धि कम्पनी पर ही अधारित थी। अंग्रेजी कम्पनी की वित्तीय अवस्था अधिक सुदृढ़ थी कम्पनी के प्रबन्ध में कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं किया जाता था। अंग्रेजी कम्पनी की नीति पहले व्यापार फिर राजनीति थी history gk in hindi।
कम्पनी के अभिकारी सदैव व्यापार के महत्व पर बल देते थे दोनों कम्पनियों के व्यापार पर दृष्टि डाले तो अंग्रेजी कम्पनी का व्यापार फ्रासीसी कम्पनी से चार गुना ज्यादा था जिसका परिणाम यह हुआ कि कम्पनी को युद्ध के लिये धन की कमी कभी भी महसूस नहीं हुई। इसके अतिरिक्त अंग्रेजी कम्पनी के अधिकारियों के रूय सहयोग एवं सहायता की भावना थी जबकि कासीसी कम्पनी के अधिकारियों सेनापतियों वो मध्य सहयोग एवं सहायता की भावना का अभाव था।
फासीसीयों के पास उत्तम बस्तियों का अभाव
अंग्रेजी व्यापारी भारत में फ्रासीसीयों से लगभग 65 वर्ष पहले आये थे अतः उन्होंने भारत में उत्तम तथा बढ़िया बस्तियां स्थापित कर ली थी बम्बई की बस्ती माही की अपेक्षा बढ़िया थी जबकि चन्द्र नगर कलकत्ता की तुलना में कुछ भी नहीं था. पोंडिचेरी मदास से कमी भी बराबरी नहीं कर सकता था। अंग्रेजो ने भारत में बम्बई कलकत्ता एवं मद्रास में महत्वपूर्ण ठिकाने बना लिये थे जबकि फ्रासीसीमों के पास केवल पॉडिचेरी था history gk in hindi।
अंग्रेजों का मुख्य केन्द्र बम्बई हर दृष्टि से उत्तम था जहां जहाजों को सुरक्षित रखने एवं मरम्मत की सुविधा थी। बम्बई उत्तर भारत के साधनों पर नियन्त्रण के लिये सर्वथा उपयुक्त था। फ्रान्सीसीयों के पास उत्तर भारत में ऐसा कोई स्थल नहीं था जिससे वे उत्तर भारत के साधनों का यथोचित प्रयोग कर सकते थे history gk in hindi।
पीडियेरी से आरम्भ करके भारत में साम्राज्य स्थापित करना प्रायः असम्भव था। वावी०ए० स्मिथ ने लिखा है “पांडिचेरी को आधार बनाकर तो सिकन्दर महान अथवा नेपोलियन जैसा विजेता भी भारत वर्ष में उस क्तता से लोहा नहीं ले सकता था जिसका बंगाल पर अधिकार था समुद्र पर निमन्त्रण
अंग्रेजो का बंगाल पर अधिकार
कासीसीयों की पराजय का एक बड़ा कारण अंग्रेजों की बंगाल पर विजय श्री क्योकि प्लासी की विजय ने अंग्रेजो को बंगाल के अपार धन एवं जनसंख्या का रवागी बना दिया history gk in hindi।
जिस समय काउंट लाली को अपने सैनिकों को वेतन देने की चिन्ता थी बंगाल कर्नाटक में धन एव जन दोनो की पर्याप्त आपूर्ति कर रहा था इसी के बल पर अंग्रेजो ने कर्नाटक में फासीसीयों पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध थी। मेरियट ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि गुप्ते ने मद्रास में भारत की चावी खोजने का निष्फल प्रयत्न किया। कलाइव ने यह चावी बंगाल में खोजी और प्राप्त करली
अंग्रेज एवं फ्रासीसी अधिकारियों की योग्यता में अन्तर
अंग्रेज और फ्रांसीसी अधिकारियों की योग्यता में अन्तर भी अंग्रेजो की विजय एवं फ्रासीसीयों की पराजय का एक महत्वपूर्ण कारण था। अंग्रेजी कम्पनी का राजनैतिक एवं सैनिक नेतृत्व फासीसी कम्पनी की अपेक्षा अधिक उत्तम था history gk in hindi।
दूप्ले तथा दुस्सी व्यक्तिगत रूप से क्लाइव लारेन्स एवं साण्डर्स से कम नहीं थे किन्तु उन्हें न तो अपने अधिकारियों से और न ही गृह सरकार से वह मदद मिली जो आवश्यक थी। डूप्ले साहसी एवं सफल कूटनीतिज्ञ तो था किन्तु उसकी कमी यह थी कि वह स्वयं अपने सैनिकों में जोश एवं उत्साह नहीं भर सकता था history gk in hindi।
लाली भी योग्य था किन्तु उसका स्वभाव बढ़ा उग्र था वह पांडिचेरी में कम्पनी के सभी कार्यकर्ताओं को बेहमान एवं झूठा समझता था तथा डरा-धमकाकर कार्य करवाने की प्रवृत्ति से उसके अधीनस्थ इतने नाराज थे कि जब लाली पराजित हो गया तो इन लोगों को प्रसन्नता हुई history gk in hindi।
लाली यह समझने की भूल कर गया कि विदेशी भूमि पर आपसी सहयोग एवं त्याग ही सबसे बड़ी शक्ति है। मालेसन के अनुसार लारेन्स, साण्डर्स, कैलियाड, फोर्ड आदि अनेक अंग्रेज पदाधिकारी प्ले के लाज, दा-व्यूल, ब्रेनियर जैसे फासीसी अधिकारियों से कई गुना गौर, साहसी एवं उत्तम थे history gk in hindi।
नौसेना की भूमिका
अंग्रेजो की नौसैनिक श्रेष्ठता भी फासीसीयों के विरूद्ध उनकी सफलता का निर्णायक तत्व रहा है। यह बात पहले से स्पष्ट थी कि जो समुद्र पर राज करेगा वही संसार पर राज करेगा ढाले को प्रारम्भिक सकलता नौसेना के माध्यम से ही मिली क्योकि उस समय अंग्रेजी नौसेना निष्क्रिय थी किन्तु सप्तवर्षीय युद्ध के कारण अंग्रेजी नैसेना जब सक्रिय हुई तो उसने अपने वरिष्ठता सिद्ध कर दी इसी कारण लाली को ठूप्ले जैसी सफलता नहीं मिल सकीhistory gk in hindi।
उजास के वापरा मारीशस जाने से भारतीय जल क्षेत्र का मार्ग अंग्रेजो के लिये बिल्कुल साफ हो गया इससे अंग्रेजी के लिये न केवल भारतीय व्यापार मार्ग खुले रहे अपितु बम्बई से कातकरता तक जलमार्ग द्वारा सेना का आवागमन अबाध रूप से चलता रहा।
इसीलिये कहां जाता है कि यदि शेष कारण बराबर भी होते तो भी जलसेना की वरिष्ठता फ्रासीसीयों को परास्त करने के लिये पर्याप्त थी। प्रा० ठाडवेल ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि सामुद्रिक शक्ति का प्रभाव ही मुख्य कारण था जो अंग्रेजी सफलता का कारण बना history gk in hindi।
यद्यपि फ्रासीसी नौसेना कभी भी पूर्णरूपेण नष्ट नहीं हुई तथापि विभिन्न युद्धो वो फलस्वरूप अंग्रेजों को अजेय वरिष्ठता प्राप्त हो गयी। अंग्रेजों को बंगाल से धन, रसद तथा यूरोप से नई भरती की गयी सेना और उत्तरी भारत से अन्न मिलता रहा किन्तु फासीसीयों को यह सब नहीं मिल सका इसीलिए अंग्रेज निरन्तर शक्तिशाली होते गये जबकि फ्रांसीसी निरन्तर कमजोर परिणामस्वरूप आयर कूट को लाली पर स्पष्ट विजय प्राप्त हो गयी तथा फ्रांसीसी पाँडिचेरी में सिमटने के लिये विवश हुए।
डूप्ले की वापसी history gk in hindi Important Topics
कई इतिहासकार फासीसीयों के हार के लिये यूप्ले पर आक्षेप करते है। इन इतिहासकारों के मतानुसार यद्यपि डूप्ले एक योग्य एवं उत्तम नेता था तथापि वह राजनैतिक मसलो में ऐसा उलझ गया कि उसने व्यापार एवं वित्तीय पक्ष की अवहेलना की जिससे कम्पनी के व्यापार में अत्यधिक गिरावट आ गयी history gk in hindi।
द्वितीय कर्नाटक युद्ध के दौरान 1754 में उसे वापस बुला लिया गया किन्तु इतिहासकारों का एक बड़ा वर्ग फ्रांसीसी हार के लिये डूप्ले को जिम्मेदार नहीं मानता है इनके कचानुसार कम्पनी के हार के पीछे सैनिकों एवं धन की कमी थी। डूप्ले एक चतुर राजनेता था यदि उसे फासीसी सरकार द्वारा वापस न बुलाया गया होता तो इस युद्ध का परिणाम कुछ दूसरा होता डूप्ले के अतिरिका अन्य दूसरा इतनी कुशलता से भारतीय मामलों का संचालन नहीं कर सकता था। अतः फासीसी हार के पीछे डूप्ले नहीं दूप्ले की वापसी जिम्मेदार थीं।
डूप्ले का जीवनचरित एवं मूल्यांकन
जोसेफ फासिस इप्ले का जन्म 1997 में लेड्रेसीज नामक स्थान पर हुआ। इसका पिता फ्रासीसी इंडिया कम्पनी का डायरेक्टर जनरल था। सन 1720 में यह पिता के प्रभाव से पांडिचेरी में एक उच्य पद प्राप्त किया history gk in hindi।
व्यक्तिगत व्यापार से उसने खूब धन कमाया परन्तु सन्देह के कारण डायरेक्टरों ने 1726 से इसे निलम्बित कर दिया। इप्ले भारत में ही रहा तथा इस निर्णय के खिलाफ अपील की जिसमें इसे सफलता मिली तथा इसको सम्मान सहित बरी करते हुए 1730 में चन्द्र नगर का डायरेक्टर नियुक्त किया गया history gk in hindi।
अपनी योग्यता एवं कार्य के कारण 1742 में उसे पोंडिचेरी का गवर्नर तथा भारत में फ्रांसीसी बस्तियों का डायरेक्टर जनरल नियुक्त कर दिया गया जिस पद पर वह 1754 तक आसीन रहा। मुगल सम्राट द्वारा कृष्णा नदी से कन्याकुमारी के बीच के क्षेत्र का यह नवाब घोषित किया गया था history gk in hindi।
डूप्ले एक महान प्रशासक, दक्षकूटनीति था जिसमें राजनीतिक अन्तदृष्टि तथा दूरदर्शिता भी समाहित थी। दूप्ले भारत में आने पर अपनी निजी व्यापार के कारण शीघ्र ही धनी हो गया लेकिन उसके विभिन्न गुणों के प्रदर्शन का मौका चन्द्र नगर के डायरेक्टर बनाये जाने पर मिला history gk in hindi।
डूप्ले के एक योग्य प्रशासन से पन्द्र नगर बंगाल में सबसे अच्छी यूरोपीय बस्ती बन गया। दूले ने व्यापारिक उन्नत्ति के लिये अपनी निजी पूँजी व्यापार में लगाई, सहयोगियों का ऋण प्रदान किया तथा भारतीयों को बन्द्र नगर में बसने के लिये प्रोत्साहित किया history gk in hindi।
बन्द्र नगर की उन्नति में दुष्प्ले द्वारा प्रदर्शित असाधारण योग्यता ने फ्रांस में जायरेक्टर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया जिससे उसे पीडिचेरी का गर्वनर जनरल बना दिया गया। डूप्ले में विद्यमान ऊर्जा एवं गुणों के विकास की दृष्टि से चन्द्र नगर छोटी बस्ती थी किन्तु अब जबकि वह पौडिचेरी का गवर्नर बना उसकी प्रतिभा को पूर्णरूप से विकसित होने का अवसर मिला। जिस समय यह पोंडिचेरी का गवर्नर बना उस समय पीडिचेरी एक उजाड़ एवं वीरान क्षेत्र था।
खेती नही हो रही थी तथा दुर्भिक्ष से जन संख्या भी थौड़ी ही रह गयी थी। कर्नाटक में उत्तराधिकार के संघर्ष से यह स्थिति और भी भयानक हो चुकी थी पॉडिचेरी की सुरक्षा का इनाजाम भी नाकाफी था यूरोप में अंग्रेज एवं फ्रांस के मध्य युद्ध की सम्भावना बनी हुई थी ऐसी स्थित्ति में दूप्ले ने पौडिचेरी की सुरक्षा का पुख्ता बन्दोबस्त करना चाहा किन्तु कम्पनी के डायरेक्टरों की रुचि भारत की अपेक्षा उत्तरी अमेरिका में होने के कारण इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था तथा दुप्ले को व्यय में कमी करने की सलाह दी गयी।
दूप्ले इस विनाशकारी आदेश की अवहेलना करते हुए पांडिचेरी की दृढ किलेबन्दी की और इसमें अपना भी बहुत सा धन व्यय किया। आय एवं व्यय पर नियन्त्रण स्थापित किया शीघ्र ही पीडिचेरी दक्षिण भारत की सर्वप्रमुख मण्डी बन गयी। इस प्रकार चन्द्र नगर एवं पीडिचेरी के उत्थान ने डूप्ले के प्रश्शारानिक योग्यता को सिद्ध कर दिया history gk in hindi।
अनेक इतिहासकारों ने दूधले की गणना विश्व के प्रमुख राजनीतिज्ञों एवं चतुर कूटनीतिज्ञों के रूप में की है। कुशल राजनीतिज्ञ होने के कारण उसने शीघ्र ही यह अनुभव किया कि यदि अंग्रेजो को भारत से निकाल दिया जाय तो मारत में क्रासिसियों का साम्राज्य सुगमता पूर्वक स्थापित किया जा सकता है इसी कारण उसने अंग्रेजो के साथ कर्नाटक युद्धों का सूत्रपात किया।
वह वास्तव में मौलिक प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति था तथा उसने कल्पनाशील उर्वर मस्तिष्क से साम्राज्य स्थापना की एक नयी नौति को जन्म दिया history gk in hindi.
प्रथम कर्नाटक युद्ध दौरान जब उसे लगा कि ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजा गया नौसेना का कमाण्डर चारनेट पाँडिचेरी घेर लेगा तो उसने नवाब से प्रार्थना की कि यह अंग्रेजों को नवाब के क्षेत्र में युद्ध करने से रोके, नवाब ने यह प्रार्थना स्वीकार कर अंग्रेज गर्वनर को आदेश दिया कि अंग्रेजों को फ्रासीसी बस्ती पर आक्रमण की अनुमति नहीं देगा।
इस प्रकार का कार्य यूप्ते के कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है आगे चलकर ला बोर्डाने की सहायता से जब यूप्ले मद्रास जीतने की स्थिति में आया तो उसने नवाब को यह समझाया कि मद्रास जीतकर यह इसे नवाब को दे देगा। यूप्ले की यह कूटनीति पूर्णतः सफल रही history gk in hindi।
दूसरे कर्नाटक युद्ध में उसकी यह कूटनीति और भी सफल हुई। प्ले का मुख्य उद्देश्य राजनैतिक प्रभाव को बढ़ाना या उसने यह स्पष्ट कर दिया कि कैसे यूरोपीय लोग देशी राजाओं के आपसी द्वन्द का सफलतापूर्वक फायदा उठा सकते हैं। उसने कर्नाटक तथा हैदराबाद के उत्तराधिकार के लिये चान्दा साहब एवं मुजफ्फरजंग का समर्थन कर दोनों से फासिसियों के लिये बहुत सा लाभ प्राप्त कर लिया तथा भारतीय नरेशों द्वारा उसे नदाब की उपाधि से सुशोनित किया गया history gk in hindi।
डूप्ले एक योग्य एवं जन्मजात नेता था उसके अधीनस्थ कर्मचारी डूप्ले के निर्णयो एवं नीतियों पर आँख बन्द कर विश्वास करते थे तथा उसकी आज्ञाओं का पालन बिना किसी हिचकिचाहट के करते थे history gk in hindi।
1754 में जब डायरेक्टरों ने डूप्ले को दोषी मानते हुए वापस बुलाने का आदेश दिया तो बहुत से अधीनस्थों ने त्यागपत्र देने का निश्चय कर लिया पुस्सी ने भी त्याग पत्र दे दिया तो डूप्ले ने उससे कार्य करते रहने का अनुरोध किया प्रति उत्तर में बुस्सी ने जो लिखा है उसे पढ़कर यह स्पष्ट हो जाता है कि यूप्ले को उसके अधीनस्थों का समर्थन प्राप्त था और वे नृप्ले की वापसी के आदेश को आत्महत्या जैसा कदम मानते थे।
दुरसी ने डूप्ले को पत्र लिखा कि आपका यूरोप जाना वह राजाधात है जिससे में भयभीत हो उठा हूँ तथा किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया हूं आप जा रहे हो और मुझे कहते हो कि देश सेवा में लगे रहो और उस कार्य को जो नष्ट प्राय है उसे करते रहो। क्या आप वस्तुतः विश्वास करते है कि मेरा भी वही अपमान नहीं होगा जो आपका हुआ है। परन्तु जो भी हो मैने निश्चय कर लिया है कि यह मेरा कर्तव्य है कि आपका परामर्श स्वीकार कर उसका अनुसरण करूं history gk in hindi।
मालेसन ने “भारत में फ्रांसीसीयों का इतिहास नामक पुस्तक में इस बात को उल्लिखित किया है कि जुप्ले की वापसी में अंग्रेजों का हाथ था आगे इन्होने लिखा कि अंग्रेजी राजदूत ने फांसीसी विदेशामन्त्री को कहा था कि दूप्ले की नीतियां दोनो देशो के हित में नहीं है।
माालेसन का कथन है कि हम उस अन्येधन, मूर्खता तथा उन्माद पर जिससे डूप्ले को वापस बुलाया केवल विस्मय ही प्रकट कर सकते है। भालेसन का विश्वास है कि अगर खूप्ले 2 वर्ष और भारत में रह जाता तो बंगाल का धन अंग्रेजो के स्थान पर फ्रांस की गोद में जा गिरता history gk in hindi।
दूप्ले एक अग्रगामी नीतियों वाला राजनीतिज्ञ था भारत में अपने कार्यकाल के प्रारम्भ में उसने व्यापार एवं सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित किया किन्तु भारत की बिगडती राजनीतिक दशा को देखकर भारत में फ्रांसीसी साम्राज्य स्थापित करने का स्वप्न देखने लगा।
यूप्ले पहला व्यक्ति था जिसने देशीय राज्यों के मामले में हस्तक्षेप किया जिसने अनुशासित सिपाहियों की श्रेष्ठता स्थापित की। डूप्ले के राजनैतिक विचारों एवं उद्देश्यों पर कुछ इतिहासकारों का कहना है कि दूप्ले साम्राज्य निर्माताओं के अग्रगामी थे, तथा उन्होने भारत विजम की सुनिश्चित योजना बनाई हुई थी history gk in hindi ।
मैकाले ने भी इसका समर्थन करते हुए लिखा है कि भारतीयों के संघर्ष में हस्तक्षेप करके साम्राज्य विस्तार करने की योजना उसकी मौलिक कल्पना थी। परन्तु कुछ इतिहासकार इससे सहमत नाही है history gk in hindi।
यूप्ले से जीवनी लेखक अल्फ्रेड मार्टिन्यू का विश्वास है कि 1749 अथवा 1750 तक इप्ले का ऐसा कोई स्वप्न नहीं था मार्टिन्यू के अनुसार भारत में फ्रांसीसी उपनिवेश का विचार वित्तीय आवश्यकता के फलस्वरूप पैदा हुआ। यूप्ले के समक्ष सदैव धन की कठिनाई सामने आती थी और फ्रांस भी धन नहीं उपलब्ध करा पाता था history gk in hindi।
अन्ततः उसने यह सोचा कि इन कठिनाइयों से बचने का केवल एक ही उपाय है कि फ्रांस से सनानापित की आशा त्याग कर भारत में ही पर्याप्त धन प्राप्त करने की व्यवस्था की जाय। इसके लिये यह आवश्यक है कि स्थानीय प्रदेशों से एक निश्चित आय प्राप्त हो और यह तभी सम्भव है जब राजसत्ता उसके हाँथ में हो यही विचार पहले डूप्ले के मन में उठा फिर उसने इसे विकसित किया तथा भारत में अपने लाभ के लिये औपनिवेशिक साम्राज्य बनाने का विचार बनाया।
प्रो० डाळवेल एवं पी०ई० राबर्ट्स, मार्टिन्यू के विचारों का समर्थन करते है। पी०ई० राबर्ट्स ने डूप्ले के बारे में लिखा है कि अपनी अन्तिम असफलताओं के बावजूद भी डूप्ले भारतीय इतिहास का एक प्रतिभावान एवं तेजस्वी व्यक्ति है हम उसके प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण भी अपनाएं तब भी महानता विषयक उसके दावे का झुठलाया नहीं जा सकता history gk in hindi।
डूप्ले ने कुछ वर्षों तक पूर्व में फ्रांस की प्रतिष्ठा को विस्मयजनक ऊंचाईयों तक उठाया। भारतीय राजाओं एवं राजनायिकों की दृष्टि में जितना सम्मान उसका था उतना किसी अन्य विदेशी को नहीं मिला, उसने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि एवं असाधारण व्यक्तित्व के बल पर अपने अंग्रेज प्रतिद्वन्दियों में भय एवं आतंक फैला दिया था।
यूप्ले ने पहली बार जिन हथकण्डो का उपयोग भारत जीतने के लिये किया बाद में यही अंग्रेजो का मार्ग दर्शक बना। यह दूप्ले ही था जिसने पहली बार यूरोपीय सेनाओं को देशी राजदरबारों में भारतीय व्यय पर नियुक्त करवाया तथा जिसने पहली बार यूरोपीय हितो के लिये भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप किया history gk in hindi।
तथा यह पहला व्यक्ति था जिसने भारत में यूरोपीय साम्राज्य निर्माण की नींव डाली। मालेसन ने लिखा है कि “इप्ले की योजनाओं का प्रभाव जसके जाने के बाद भी रहा वह भूमि जिसे उत्सने अपनी सुझबूझ से जीता तथा उर्वर बनाया और वह क्षमता जो उसने दर्शाई उसके लौटाने के तुरन्त पश्चात् उसके प्रतिद्वन्दियों ने उपयोग की और उससे अत्यधिक लाभ उठाया।
परन्तु डूप्ले के भारत में उसकी सूझबूझ राजनीतिक चतुराई के बावजूद सफलता नहीं मिली। उसकी असफलता के कारणों का मूल्यांकन करते हुए जीवनी लेखक मार्टिन्यू लिखता है कि इप्ले के गलत निर्णय एवं उसकी हठधर्मी ही उसके पतन का कारण बनी उसने अपनी राजनीतिक योजनाओं की सही एवं पूरी जानकारी फ्रांसीसी सरकार को नहीं दी इसलिये फ्रांस ने भारतीय मदद में रुचि नाही ली।
दूप्ले की उद्देश्य पूर्ति के लिये भारत में फ्रांसीसी साधन पर्याप्त नहीं थे। डूप्ले की इसी भूल ने इसे असफल बना दिया। प्रो० दाठवेल का विचार है कि डूप्ले ने अपनी पहुंच से अधिक प्राप्त करने का प्रयत्न किया जिसके कारण वह अपने सामन भी गवां बैठा तथा असफल भी हुआ history gk in hindi।
दकन एवं कर्नाटक इतना उर्वर एवं सक्षम क्षेत्र नहीं था जिसे प्राप्त करने के लिये विदेशी शक्ति से टक्कर ली जाती, उसकी योजनाओं की सफलता वो लिये डूप्ले को अधिक धनी प्रदेश की आवश्यकता थी। अंग्रेजो का सफलता बंगाल जैसे समृद्ध प्रदेश के कारण ही मिली।
क्लाइव के मैदान में उतरते ही दृप्ले के सौभाग्य का सितारा मन्द पढ़ने लगा यूप्ले भारत में असपफल हो गया जबकि जलाइव ने भारत में अंग्रेजी साम्राज्य स्थापित कर दिया। यदि दूप्ले के पास भी एक मनी कम्पनी होती जैसाकि इग्लिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी थी और उसे भी अंग्रेजो जैसे प्रगतिशील जाति का समर्थन प्राप्त होता तो निश्चय ही वह अपने समकालीनों से अधिक सफल होता history gk in hindi।
भारतीय इतिहास में जिस प्रेरणा एवं राजनीतिज्ञश चातुर्य का प्रदर्शन यूपले ने किया उसकी बराबरी को सम्भवतः किसी यूरोपीय व्यक्ति ने नहीं की। इप्ले के चरित्र में कुछ दोष भी थे यह अहंकारी षड्यंत्रकारी एवं कपटी स्वभाव का था यद्यपि इन गुणों से ही कार्य सिद्धि सम्भव हो सकता था तथापि इप्ले का प्रतिद्वन्दी क्लाइव उससे कई अधिक कपटी एवं षड्यंत्रकारी था।
क्लाइय को सफलता मिली जिससे उसके सब दोष छिप गये। यूप्ले वो भाग से जो सफलता उसे नहीं मिली अन्यथा वह ही मलाइव के स्थान पर भारत में फांसीसी साम्राज्य के संस्थापक के रूप में जाना जाता history gk in hindi।
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