Indian Railway History in Hindi 01

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अध्याय – 01 भारतीय रेल – एक परिचय, परिभाषा, प्रबंधन और संगठन

Indian Railway History


भारतीय रेलवे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क और एकल स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारतीय रेल पिछले 169 वर्षोंसे भी अधिक समय से भारत में परिवहन का प्रमुख घटक रहा है जिसमें लगभग 12.12 लाख कर्मचारी हैं। यह न केवल देश की मूल संरचनात्मक आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि पूरे देश को जोड़ते हुए देश की अखण्डता का संवर्धन भी करती है।

Indian Railway History
भारतीय रेल परिवहन का प्रमुख साधन होते हुए देख की अर्थव्यवस्था के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, सामाजिक लिहाज से भी बहुत मायने रखती है। ये आम आदमीका सरल, सुगम और सस्ता परिवहन साधन है। इसके कारण विभिन्न धर्मों, जातियों, वर्गों, भाषा-भाषियों को आपस में मिला कर देश को


एक सूत्र में बांधने का प्रयास करती है। इसके द्वारा व्यापार उद्योग-धन्थों के साथ ही शिक्षा का प्रचार-प्रसार भी हुआ है। शहरों गाँवों का विकास, रोजगार में अभिवृद्धि में भी रेलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आपदा प्रबन्ध और देश की सुरक्षा में इसकी भूमिका को कोई इन्कार नहीं कर सकता

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रेलवे की परिभाषा
भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 धारा 2 (31) में यथा परिभाषित रेलवे से अभिप्राय है। ‘रेल’ से यात्रियों के, माल के सार्वजनिक वहन के लिये या रेल का कोई भाग अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी है –

O रेल के अनुलग्न भूमि की सीमाएं दर्शित करने वाली बाड़ या अन्य सीमा चिन्हों के भीतर की सब भूमि,
रेल के प्रयोजनों के लिये या उसके सम्बन्ध में उपयोग में लाई जाने वाली सभी रेल लाइनें, साइडिंगया यार्ड या शाखाएं,
O रेल के प्रयोजन के लिये विद्युत कर्षण, उपस्कर, विद्युत प्रदाय और वितरण प्रतिष्ठान,


O रेल के प्रयोजन के लिये या उसके सम्बन्ध में सन्निर्मित सभी चल स्टॉक, स्टेशन कार्यालय,भण्डागार, माल उतारने-चढ़ाने के स्थान, कार्यशालाएँ, विनिर्माण शालाएं, स्थिर सयंत्र तथा मशीनरी, अस्पताल, जल सकर्म तथा जलदाय प्रतिष्ठान, कर्मचारी निवास और कोई अन्य संकर्म ।
O ऐसे सभी यान जो रेल यातायात के प्रयोजनों के लिये सड़क पर उपयोग में लाये जाते हैं और जोरेल के स्वामित्व में हैं, उसके द्वारा भाड़े पर लिये जाते हैं या चलाये जाते हैं।


O ऐसे सभी नौघाट, पोत, नौकाऐं और बेड़े जो किसी नहर, नदी, झील या अन्य नाव अन्तर्देशीयजल में रेल के यातायात के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाये जाते हैं और रेल प्रशासन के स्वामित्वमें है, उसके द्वारा भाड़े पर लिये जाते हैं या चलाये जाते हैं।

किन्तु इसके अन्तर्गत निम्नलिखित नहीं है Indian Railway History –

O कोई ट्रॉम जो पूर्णतया किसी नगर पालिका क्षेत्र के भीतर है।
O रेल की वे लाइनें जो किसी प्रदर्शनी मैदान, पार्क या किसी अन्य स्थान पर मात्र मनोरंजन के
प्रयोजन के लिए निर्मित की गई है।


प्रबन्ध संरचना Indian Railway History


भारतीय संविधान के अधीन रेलों से सम्बन्धित विधायी शक्ति की सातवीं अनुसूची की सूची-1 और
प्रविशिष्ट 22, 30 और 89 के साथ पठित धारा 246 की शर्तों के अनुसार केवल संसद में निहित है।
रेलों की विधायी शक्ति तो संसद में निहित होगी ही, रेलों की कार्यपालक शक्ति भी विधायी शक्ति के
साथ भारत सरकार में निहित होगी।

Indian Railway History इसके तहत सरकारी रेलों का क्षेत्राधिकार, गैर-सरकारी रेलों का
क्षेत्राधिकार बताये गये हैं, साथ ही सरकारी और गैर सरकारी रेलों पर अपराधों से सम्बन्धित,रेल
सम्पत्ती की चोरी के सम्बन्ध में संसद में प्रश्न एवं सरकारी कर्मचारियों पर पेंशन नियमों का प्रशासन
इत्यादि शमिल है।


रेल मंत्रालय Indian Railway History


भारत के विभिन्न मन्त्रालयों में से एक है रेल मंत्रालय । यह रेल मंत्री द्वारा संचालित होता है और एक
कार्यकारी निकाय रेलवे बोर्ड है। रेलवे बोर्ड ने मार्च 1905 में वाणिज्य तथा उद्योग विभाग में सीधे
सरकार के प्रति उत्तरदायी बनकर अपना कार्यभार संभाला।


रेलवे बोर्ड


यह रेल मंत्री के कार्यों के निर्वहन में उनकी की गयी सहायता करने वाला प्रमुख निकाय है। इसकी
स्थापना भारत सरकार के एक संकल्प के तहत 18 मार्च 1905 में तत्कालीन सरकार के अधीन की
गई थी।

Indian Railway History वर्तमान में रेलवे बोर्ड रेल अधिनियम 1989 के अधीन कार्य करता है। रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली
में स्थित है और इसकी दोहरी भूमिका है एक रेल मंत्रालय के लिये तथा दूसरी सबसे उच्च कार्यकारिणी शक्ति के रूप में। इसमें एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अलग-अलग विभागों को
संभालने वाले चार प्रमुख सदस्य जिनमें एक वित्त सदस्य तथा चार महानिदेशक होते हैं। इसका सम्पूर्ण
संगठनात्मक ढांचा आगे विस्तार से बताया गया है।

अध्यक्ष का स्थान भारत के मुख्य सचिव का होता है और सदस्यों का स्थान सचिव का होता है। पूरी भारतीय रेलों के प्रबंधन और संचालन के लिये रेलवे बोर्ड, रेल मंत्री के प्रति उत्तरदायी होता है। रेलवे बोर्ड की सहायता के लिये अतिरिक्त सदस्य, कार्यकारी निदेशक, निदेशक, उप-निदेशक तथा अन्य कार्यालयी कर्मचारी होते है। रेलवे बोर्ड का मुख्य कार्य नीति-निर्धारण का है।


क्षेत्रीय रेलवे


प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे का मुखिया, महाप्रबंधक होता है और उनकी सहायता के लिए अतिरिक्त महाप्रबंधक तथा प्रधान विभागाध्यक्ष होते हैं। ये विभागाध्यक्ष यातायात, वाणिज्य, लेखा, कार्मिक, सिविल इंजीनियरिंग, यांत्रिक इंजीनियरिंग, विद्युत इंजीनियरिंग, सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियरिंग, Indian Railway History

सामग्री, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभागों का कार्य देखते हैं। इसके अतिरिक्त सतर्कता संबंधी कार्य के लिये
वरिष्ठ उप-महाप्रबंधक मुख्य सतर्कता अधिकारी होता है तथा मुख्य यातायात परियोजन प्रबंधक एवं मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी, योजना तथा प्रचार के लिये होते हैं। यदि किसी विभाग में एक से अधिक विभागाध्यक्ष हैं, तो उनमें से वरिष्ठतम संयोजक विभागाध्यक्ष कहलाता है। इन सभी का कार्यालय


क्षेत्रीय रेलवे का मुख्यालय कहलाता है। क्षेत्रीय रेलवे, रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित नीतियों के अनुरूप कार्यों का अधिक्षण एवं नियंत्रण करता है। भारतीय रेलवे में फिलहाल 18 क्षेत्रीय रेलवे शामिल हैं।


क्षेत्रीय रेलवे का नाम Indian Railway History

  1. उत्तर रेलवे – बडौदा हाऊस, नई दिल्ली 14.02.1952
  2. मध्य रेलवे – छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, मुम्बई 05.11.1951
  3. पश्चिम रेलवे – चर्चगेट, मुम्बई 05.11.1951
  4. दक्षिण रेलवे – चेन्नई 14.04.1952
  5. पूर्वी रेलवे – फेयरली प्लेस, कलकत्ता 14.04.1952
  6. उत्तर पूर्वी रेलवे – गोरखपुर 14.04.1952
  7. उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे मालीगाँव, गुवाहाटी 15.01.1958
  8. दक्षिण पूर्वी रेलवे गार्डनरीच, कलकत्ता 01.08.1955
  9. दक्षिण मध्य रेलवे सिकन्दराबाद 02.10.1966
  10. उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर 01.10.2002
  11. पूर्व मध्य हाजीपुर 01.10.2002
  12. उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद 01.04.2003
  13. दक्षिण पश्चिम रेलवे हुबली 01.04.2003
  14. पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर 01.04.2003
  15. पूर्व तटवर्ती रेलवे भुवनेश्वर 01.04.2003
  16. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर 01.04.2003
  17. कोलकाता मेट्रो रेलवे कोलकाता 20.02.2009
  18. दक्षिण तटीय रेलवे (घोषित) विशाखापट्टनम 26.02.2019

मंडल Indian Railway History


प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे को प्रबंध एवं संचालन की सुविधा के लिये पुनः छोटी इकाईयों में बाँटा गया है जिसेमंडल कहते हैं। वर्तमान में भारतीय रेलों में 69 मंडल कार्यरत हैं। प्रत्येक मंडल का एक अध्यक्ष होताहै जो मंडल रेल प्रबंधक कहलाता है।

यह वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) स्तर का होता है और इसकीसहायता के लिये अपर मंडल रेल प्रबंधक और विभाग के कनिष्ठ प्रशासनिक स्तर के, वरिष्ठवेतनमान स्तर के एवं कुछ कनिष्ठ वेतनमान स्तर के सहायक अधिकारी होते हैं। मंडल वह स्थान हैजहाँ से साधनों के अनुसार यातायात का वास्तविक संचालन किया जाता है। ये रेलवे स्टेशनों व अन्य
कार्यकारी इकाईयों पर सीधा नियंत्रण एवं सम्पर्क रखते हैं।

उपरोक्त सरकारी संस्थानों के अतिरिक्त कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी हैं जो सरकारी एवं निजी
साझेदारी में कार्य करते हैं। इनका विवरण भी आगे विस्तार से बताया है। इनमें कुछ प्रमुख हैं –

RITES रेल इण्डिया टेकनिकल एण्ड इकॉनोमिक सर्विसेज लिमिटेड
IRCON इण्डियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कम्पनी लिमिटेड
IRFC इण्डियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन
CONCOR- कन्टेनर कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड
KRCL कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड
PRCL पिपावाव रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड
CRIS – सेन्टर फॉर रेलवे इन्फोरमेशन सिस्टम

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IRCTC इण्डियन रेलवे केटरिंग एण्ड ट्यूरिज्म कॉरपोरेशन
RCIL रेल टेल कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड
RVNL रेल विकास निगम लिमिटेड
DMRC दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड
MRVC मुम्बई रेल विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड
DFCCILC डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड

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KRDCL केरल रेल डवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड
BWEL भारत वैगन एण्ड इंजीनियरिंग कम्पनी लिमिटेड
BSCL बर्न स्टेण्डर्ड कम्पनी लिमिटेड
BCL ब्रेथवेट एण्ड कम्पनी लिमिटेड
NHSRCL नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड

NAIR – ( Indian Railway History ) National Academy of Indian Railway, Vadodara
IRISET – Indian Railway Institute of Signal Engineering &Telecommunication, Secundrabad
IRICEN – ( Indian Railway History ) Indian Railway Institute of Civil Engineering, Pune
IRMEE – Indian Railway Institute of Mechanical & Electrical
Engineering, Jamalpur

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IRIEEN – ( Indian Railway History ) Indian Railway Institute of Electrical Engineering, Nasik
Road
RDSO – ( Indian Railway History ) Research Design and Standards Organization, Lucknow
IRITM – Indian Railway Institute of Transport Management, Lucknow
IRCAMTECH – ( Indian Railway History ) Indian Railway Centre for Advanced Maintenance
Technology, Gwalior

अन्य विविध स्थापनाएं
O Commissioner of Railway Safety, Lucknow
O Deputy Railway Adviser, Tokyo
O Railway Adviser, Berline
O Railway Adviser, Dhaka
O Director (Iron & Steel), Kolkata
O National Rail Museum, New Delhi
O Regional Rail Museum, Chennai, Howrah, Mysore, Nagpur
O Chief Mining Adviser, Dhanbad
O Railway Claims Tribunal, Delhi
O Rail Land Development Authority, New Delhi.

अध्याय – 02 भारतीय रेलवे – इतिहास


विश्व की पहली रेलगाड़ी सन् 1825 में इंग्लैंड में स्टॉकटन और डार्लिंगटन के बीच सफलता पूर्वक
चलाई गई। इसके महज 28 वर्ष बाद भारत में 16 अप्रैल, 1853 को बोरीबंदर (छत्रपति शिवाजी
टर्मिनल) और थाना के बीच 34 किलोमीटर लम्बीरेललाइन पर पहली गाड़ी चलाई गई।


भारत में पहले रेलें इण्लैंड की प्राईवेट स्टर्लिंग कम्पनियों द्वारा निर्मित और संचालित की जाती थी, बाद
में सन् 1854-60 के दौरान ईस्ट इंडिया कम्पनी द्वारा एवं 1858 में भारत सचिव, ईस्ट इण्डिया
कम्पनी, ग्रेट इण्डियन पैनिनसुला रेलवे कम्पनी, मद्रास रेलवे कम्पनी, बम्बई बड़ौदा एण्ड सेन्द्रल
इण्डिया रेल कम्पनी और कलकता और साऊथ ईस्टर्न रेलवे कम्पनियों को संविदा आधार पर संचालन
का कार्य दिया गया था।

सन् 1869 के बाद कई वर्षों तक रेलों पर पूंजीगत खर्च मुख्यताःसीधे सरकार
द्वारा ही किया जाता था और छोटे-छोटे विस्तार एवं संचालन कार्यों के सिवाय किसी गारन्टी वाली
कम्पनी के साथ कोई नई संविदा नहीं की गई। किन्तु सन् 1878 के भयानक दुर्मिक्ष के कारण सरकार
को रेल प्रणाली के शीघ्र विस्तार की आवश्यकता महसूस हुई और प्राइवेट उद्यम द्वारा वित्तीय और
दूसरे दायित्वों के निर्वहन का निर्णय लिया गया।


इस प्रकार 1903 तक भारत की सभी निजी रेल कम्पनियाँ जो कि इंग्लैंड द्वारा संचालित होती थी, के
द्वारा जारी रहा। ये सभी अपने-अपने नियम कानून के तहत कार्य करती थी उनमें एक रूपता नहीं
थी। यह महसूस किया गया कि व्यवस्थित रेल संचालन के लिये एक केन्द्रीकृत व्यवस्था बनाई जाए
और तब इण्डियन रेलवे कॉफ्रेंस एसोसिएशन, नई दिल्ली की स्थापना की गई जो बाद में मार्च 1905
में रेलवे बोर्ड की स्थापना का आधार बना जो सरकार के अधीन कार्य करता था।


जैसे-जैसे निजी रेल संचालन कम्पनियों की संविदा समाप्त होती गई,उनका प्रबंधन सीधे सरकार द्वारा
अपने हाथों में ले लिया गया। ये निम्नानुसार तिथियों में लिया गया –

स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय 15 अगस्त, 1947 को देश विभाजन से पूर्व कई क्षेत्रीय रेले थी जिन पर
रियासती अधिकार था। इनको भी सरकार ने निम्न तिथियों में अपने हाथ में ले लिया –
क्र.सं. रियासती रेलवे सरकारी नियंत्रण की तिथि
01 गायकवाड़ बड़ौदा रेलवे 01 अगस्त 1949
02 बीकानेर स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950
03 कच्छ स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950
04 धौलपुर स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950
05 जयपुर स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950
06 जोधपुर रेलवे 01 अप्रैल 1950
07 मैसूर स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950
08 निजाम स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950
09 राजस्थान रेलवे 01 अप्रैल 1950
10 सौराष्ट्र रेलवे 01 अप्रैल 1950
11 सिंधिया स्टेट रेलवे 01 अप्रैल 1950

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